1947 के बंटवारे ने दो दोस्तों को किया था जुदा, 74 साल बाद करतारपुर में मिले
नई दिल्ली, 23 नवम्बर। 1947 में भारत के बंटवारे के चलते बिछड़े दो दोस्तों ने इसकी कभी कल्पना भी नहीं होगी कि वे फिर कभी एक दूसरे मिल सकेंगे लेकिन 74 साल बाद ये मौका आया। करतारपुर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब में 74 साल बाद ये दोनों दोस्त एक दूसरे से मिले।

बंटवारे में अलग हो गए थे दोनों दोस्त
1947 में देश की आजादी के साथ बंटवारे की त्रासदी भी हुई जिसमें लाखों लोगों को अचानक अपना घर-बार छोड़कर दरबदर होना पड़ा था। इनमें ही थे सरदार गोपाल सिंह (94) और मुहम्मद बशीर (91) भी थे। कभी साथ-साथ खेलने वाले दो दोस्तों को बंटवारे ने एक झटके में अलग कर दिया।
जब सरदार गोपाल सिंह करतार कॉरिडोर खुलने के बाद गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन के लिए पहुंचे तो उन्हें ये नहीं पता था कि यहां पवित्र जगह के दर्शन के साथ ही 74 साल पहले बिछड़े दोस्त मुहम्मद बशीर से भी मिलने का मौका मिलेगा जो पाकिस्तान के नरोवल शहर से वहां पहुंचे थे।

बंटवारे से पहले के दिनों को किया याद
पाकिस्तान के डॉन अखबार ने इस मुलाकात की खबर को प्रकाशित की और लिखा जैसे ही दोनों दोस्तों ने एक दूसरे को पहचाना दोनों भावुक हो गए। दोनों ने विभाजन से पहले की अपनी युवावस्था के उन दिनों को याद किया जब वे डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे में साथ जाते थे और वहां साथ में दोपहर का खाना और चाय पीते थे। ये खबर देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। कईयों ने तो इसे किसी फिल्म की कहानी की तरह बताया।

करतारपुर की दिल छूने वाली कहानी
हरजिंदर सिंह कुकरेजा ने ट्विटर पर लिखा "धर्म और तीर्थायात्रा को कुछ देर के लिए किनारे कर दीजिए.. ये करतारपुर की दिल छूने वाली कहानी है। करतार कॉरिडोर ने दो उम्रदराज दोस्तों भारत के सरदार गोपाल सिंह (94) और पाकिस्तान के मुहम्मद बशीर (91) को 74 साल बाद मिला दिया। वे 1947 के बंटवारे में अलग हो गए थे।
एक अन्य यूजर ने लिखा कि हम भाग्यशाली हैं कि हमने बंटवारे का आखिरी पुनर्मिलन के साक्षी बने हैं। ये सोचकर दुखी हूं कि कुछ ही दशकों में ये पीढ़ी चली जाएगी। केवल वही जानते हैं कि वे किस दर्द से होकर गुजरे हैं।

सिखों का महत्वपूर्ण तीर्थ है दरबार साहिब
करतारपुर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब सिखों का बहुत ही महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है लेकिन पाकिस्तान में होने के चलते भारत के सिखों के लिए यहां पर दर्शन मुश्किल हुआ करता था। इसे ही हल करने के लिए भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने मिलकर करतारपुर कॉरिडोर बनाने पर सहमति दी। यह कॉरिडोर भारत के गुरदासपुर स्थित गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक साहिब से पाकिस्तान के करतारपुर स्थित दरबार साहिब को जोड़ता है। कोरोना के चलते इसे बंद कर दिया गया था लेकिन इस बार हालात ठीक होते नजर आने पर सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव की जयंती पर सरकार ने इसे फिर से खोलने का फैसला किया है। इस कॉरिडोर से सिख तीर्थयात्री बिना वीजा के पाकिस्तान स्थित दरबार साहिब के दर्शन कर सकते हैं।












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