डेपसांग में चीनी मूवमेंट पर पूर्व रक्षा राज्यमंत्री ने जताई चिंता, कहा- दौलत बेग ओल्डी को हो सकता है खतरा
नई दिल्ली: लद्दाख में LAC पर विवाद पिछले करीब दो महीनों से जारी है। इस बीच गलवान घाटी में हुई झड़प की वजह से दोनों देशों में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। गलवान घाटी के बाद अब चीन की नजर डेपसांग के वाई जंक्शन पर है। जिस पर पूर्व रक्षा राज्यमंत्री पल्लम राजू ने भी चिंता जताई है। उनके मुताबिक चीन सीमा पर जो हालात बने हैं, वो भारत सरकार की नाकामी का नतीजा हैं।
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एक ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस के दौरान पल्लम राजू ने चीन सीमा पर शहीद हुए जवानों को नमन किया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल वक्त में पूरा देश सेना के साथ खड़ा है। उन्होंने डेपसांग में चीनी सेना के मूवमेंट पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि डेपसांग में 18 किलोमीटर अंदर तक चीनी सेना घुसपैठ की फिराक में है। जो वास्तविक रूप से एक बड़े खतरे का संकेत है। इसके साथ ही उनकी आर्टिलरी के रेंज में आने से दौलत बेग ओल्डी को भी खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि 2013 में भी चीन ने डेपसांग में इसी तरह की हरकत की थी। उस दौरान 21 दिनों तक गतिरोध चला, इसके बाद उसे पीछे हटना पड़ा था। ऐसे में सरकार को इस बार भी कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।
क्यों अहम है डेपसांग?
दरअसल गलवान की तरह डेपसांग का वाई जंक्शन भी बेहद संवेदनशील इलाका है। यहां से दौलत बेग ओल्डी (DOB) की दूरी सिर्फ 30 किलोमीटर है। दौलत बेग ओल्डी को कुछ साल पहले ही भारतीय वायुसेना ने विकसित किया था। तब से ये वहां का प्रमुख सैन्य ठिकाना है। अगर चीन फिंगर प्वाइंट 10 और 13 के बीच डेरा डालता है, तो डीओबी की दूरी वहां से सिर्फ 7 किलोमीटर ही रह जाएगी। इस वजह से ये एक चिंता का विषय बना हुआ है।












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