फायरब्रांड मौलाना की हुंकार से घुटनों पर आई पाकिस्तान की इमरान सरकार
बेंगलुरू। फ्रायरब्रांड मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी सरकार के मुखिया इमरान खान को घुटनों पर ला दिया है। आजादी मार्च का नेतृत्व कर रहे फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को इस्तीफा सौंपने के लिए दो दिन की मोहलत दी थी, लेकिन अभी तक इमरान खान ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है, जिससे नाराज मौलाना ने आजादी मार्च को पूरे देश में ले जाने की बात कही है, जिससे घबराए इमरान खान ने 'आजादी मार्च के प्रदर्शनकारियों के सभी 'वाजिब' मांग मानने के लिए तैयार हो गए हैं। हालांकि उन्होंने इस्तीफा देने से मना कर दिया है।

गौरतलब है मौलाना फजुलर रहमान के नेतृत्व में इस्लामाबाद में जुटी 25 से 30 लाख समर्थकों की भीड़ ने पाकिस्तान की इमरान सरकार को बैकफुट पर ला दिया है, जिससे समझौते के लिए इमरान खान किसी भी हद तक झुकने को तैयार हो गए हैं। इमरान खान ने रक्षा मंत्री परवेज खट्टक के नेतृत्व वाली टीम को मौलाना फजलुर रहमान के साथ बातचीत के जरिए मसला सुलझाने का जिम्मा दिया है।

लेकिन मौलाना इमरान खान के इस्तीफे के अलावा किसी भी समझौते के लिए तैयार होते नहीं दिख रहे हैं। इमरान खान मौलाना फजुलर रहमान के अलावा प्रदर्शनकारियों में शामिल पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों को भी मनाने की कोशिश लगातार कर रहे हैं ताकि उनकी कुर्सी सलामत रह सके।

यही वजह है कि गत सोमवार को सरकार के दो अलग-अलग वार्ता दलों ने 'आजादी मार्च' के मद्देनजर गतिरोध को तोड़ने के लिए जेयूआई-एफ से संपर्क किया। खट्टक के नेतृत्व में पहला प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में रहमान के निवास पर रहबर समिति से मिला था।
बैठक में रहबर समिति ने विपक्ष की 4 मांगों को प्रस्तुत किया, जिसमें प्रधानमंत्री इमरान खान का इस्तीफा और देश में सेना के पर्यवेक्षण के बिना नए सिरे से चुनाव कराना शामिल है, लेकिन अंत तक दोनों पक्षों ने कोई भी सहमति नहीं बनी। मौलाना फजलुर रहमान पाकिस्तान के पीएम इमरान खान के इस्तीफे और देश में नया चुनाव और एनआरओ (नेशनल रेकन्सिलिएशन आर्डिनेंस) पर अड़े हैं।

हालांकि पाक पीएम इमरान खान को पाकिस्तानी सेना का वरदहस्त हासिल है। यही कारण है कि इमरान खान सरकार ने जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने और प्रधानमंत्री इमरान खान और सरकारी संस्थानों के खिलाफ 'लोगों को भड़काने' के लिए विद्रोह का मामला दर्ज करने का फैसला किया है।
इमरान खान सरकार को इस बात की चिंता है कि प्रदर्शनकारी वीआईपी जोन में न प्रवेश कर जाएं, जहां प्रमुख सरकारी ऑफिस और दूतावास आदि हैं। हालांकि मौलाना के इस आंदोलन को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) समेत सभी प्रमुख विपक्ष दल शामिल हैं।

उल्लेखनीय है पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के खिलाफ आजादी मार्च का नेतृत्व संभालने वाले मौलाना फजलुर रहमान एक वर्ष के कार्यकाल के दौरान इमरान सरकार की आर्थिक नीतियों, देश की आंतरिक सुरक्षा, मंहगाई, भ्रष्टाचार और भारी मात्रा लिए गए विदेशी ऋण के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए इस्लामाबाद कूच का निर्णय लिया था।
कराची से निकाला गया आजादी मार्च में लाखों की संख्या में जुटी भीड़ इस बात की तस्दीक करती है कि पाकिस्तानी अवाम इमरान सरकार से कितनी परेशान है। 27 अक्टूबर को निकला आजादी मार्च 31 अक्टूबर की रात को इस्लामाबाद पहुंचा था। तब से लेकर इमरान सरकार हलकान है और प्रदर्शनकारियों को मनाने की कोशिश में जुटी हुई है।

जेयूआई-एफ प्रमुख के मुताबिक मौजूदा सरकार का समय खत्म हो गया है और अब 'वो देश को चलाएंगे। फजलुर रहमान और समर्थक अभी भी इस्लामाबाद में डटे हैं। उनका कहना है कि जब तक इमरान खान इस्तीफा नहीं दे देगा, उनका संघर्ष जारी रहेगा। लाखों समर्थकों के साथ राजधानी इस्लामाबाद में घुसने से इस्लामाबाद में एक तरह से लॉक डाउन जैसा माहौल है।
मौलाना ने धमकी दी है कि अगर जल्द इस्तीफा नहीं सौंपा गया तो वो पूरे मुल्क को बंद कराने का माद्दा रखते हैं। अपने इरादे साफ करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों का हुजूम तब तक इस्लामाबाद में डटा रहेगा, जब तक इमरान खान को सत्ता से बाहर नहीं कर देता है।

कहा जा रहा है कि इस्लामाबाद में प्रदर्शन सफल नहीं हुआ तो मौलाना फजलुर रहमान प्लान-B पर अमल करेंगे। प्लान-B के मुताबिक मौलाना समर्थकों को पूरे पाकिस्तान में लॉक डाउन जैसी स्थिति पैदा करने करेंगे। ठीक वैसा ही जैसा अभी इस्लामाबाद का माहौल है।

हालांकि उन्होंने कहा कि वो सोमवार को विपक्ष के नेताओं से मुलाकात करने के बाद प्लान-B पर अमल करेंगे। फजलुर रहमान के प्लान-B को सुनकर सत्तासीन इमरान सरकार की चूलें हिल गई हैं और मौलाना से लगातार समझौते की कोशिश कर रही है।
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मौलाना रहमान गिराना चाहते हैं इमरान सरकार
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान रक्षा मंत्री परवेज खट्टक और पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष चौधरी परवेज इलाही ने रहबर कमेटी के साथ हुई बातचीत की जानकारी प्रधानमंत्री खान को दी। इलाही ने जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान के साथ अपनी बैठक के बारे में भी इमरान खान को जानकारी दी। रहमान पाकिस्तान की सत्तारूढ़ तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार को गिराने के लिए मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं।

रक्षामंत्री खट्टक के नेतृत्व में दो वार्ता दलों ने की समझौते की कोशिश
सोमवार को सरकार के दो अलग-अलग वार्ता दलों ने 'आजादी मार्च' के मद्देनजर गतिरोध को तोड़ने के लिए जेयूआई-एफ से संपर्क किया था. खट्टक के नेतृत्व में पहला प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में रहमान के निवास पर रहबर समिति से मिला था। बैठक में रहबर समिति ने विपक्ष की चार मांगों को प्रस्तुत किया, जिसमें प्रधानमंत्री इमरान खान का इस्तीफा और देश में सेना के पर्यवेक्षण के बिना नए सिरे से चुनाव कराना शामिल है. इस दौरान दोनों पक्षों ने कोई भी सहमति बनने को लेकर संकेत नहीं दिए।

20 से 25 लाख लोग प्रदर्शन में ले चुके हैं हिस्सा
बैठक के कुछ घंटे बाद पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी शुजात हुसैन के नेतृत्व में दूसरा सरकारी प्रतिनिधिमंडल भी मांगों पर चर्चा करने के लिए जेयूआई-एफ प्रमुख से मिला था। अधिकारियों के अनुसार, 31 अक्टूबर को आजादी मार्च के इस्लामाबाद पहुंचने के बाद से 20 से 25 लाख लोग सरकार विरोधी प्रदर्शन में भाग ले चुके हैं।

क्या है मौलाना का आखिर प्लान-बी?
इस्लामाबाद में प्रदर्शन सफल नहीं हुआ तो मौलाना फजलुर रहमान प्लान-B पर अमल करेंगे। प्लान-B के मुताबिक मौलाना समर्थकों को पूरे पाकिस्तान में लॉक डाउन जैसी स्थिति पैदा करने करेंगे। ठीक वैसा ही जैसा अभी इस्लामाबाद का माहौल है। हालांकि उन्होंने कहा कि वो सोमवार को विपक्ष के नेताओं से मुलाकात करने के बाद प्लान-B पर अमल करेंगे। फजलुर रहमान के प्लान-B को सुनकर सत्तासीन इमरान सरकार की चूलें हिल गई हैं और मौलाना से लगातार समझौते की कोशिश कर रही है।
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