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जानिए, कैसे 1947 दोहराने की साजिश में जुटा है पाक, कबीलाई सेना की भर्ती शुरू

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नई दिल्ली- दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान भले ही आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई का झांसा दे रहा हो, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। विपरीत हालातों में पाकिस्तान को अब पक्का यकीन हो चुका है कि घोषित आतंकवादी संगठनों की बदलौत वो भारत से जम्मू-कश्मीर की जंग नहीं जीत सकता। इसलिए, वह फिर से वही चाल चल रहा है, जिसके दम पर 1947 में उसने जम्मू-कश्मीर को हथियाने की नाकाम कोशिश की थी।

एयर स्ट्राइक के बाद प्रॉक्सी वॉर (proxy war)की बदली रणनीति

एयर स्ट्राइक के बाद प्रॉक्सी वॉर (proxy war)की बदली रणनीति

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार जिस दिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान के अपनी सेना के कब्जे में होने का दंभ पर रहे थे, उसी दिन वहां की सेना और सरकारी अफसर खैबर पख्तून ख्वाह (KPK)में पश्तून नेताओं के साथ आपात बैठकों में जुट गए थे। बालाकोट भी इसी इलाके में है,लिहाजा उनका मकसद कबीलाई नेताओं की भावनाएं भड़का कर उन्हें ट्राइबल मिलिशिया तैयार करने के लिए तैयार करना था। ये बातचीत खैबर पख्तून ख्वाह (KPK) प्रांत के अलावा उन कबीलाई इलाकों में भी हुई, जो पहले फेडरली एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरियाज (FATA)के नाम से जाने जाते थे। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक 27 फरवरी को ब्रिगेड कमांडर ब्रिगेडियर वकास जफर राजा और दूसरे अफसरों ने स्थानीय कबीलाई नेताओं से बात की थी। जबकि स्वात स्काउट के कमांडर मोहम्मद तहिर खट्टक ने खेबर और मोहम्मद कबीलाई जिलों में 28 फरवरी को स्थानीय नेताओं के साथ 'जिरगा'(कबीलाइयों की सभा) की थी।

भारत के खिलाफ कबीलाई सेना के इस्तेमाल की तैयारी

भारत के खिलाफ कबीलाई सेना के इस्तेमाल की तैयारी

जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी सेना नस्ली पश्तून और कबीलाई नेताओं से कहा है कि वे डिफेंस मिलिशिया और पीस कमेटी तैयार करें। जानकारी के मुताबिक कई कबीलाइयों की इनमें भर्ती भी कर ली गई है और उन्हें भारत-पाकिस्तान के बीच जंग की हालत में पाकिस्तानी सेना के साथ मोर्चा संभालने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। गौर करने वाली बात ये है कि पाकिस्तान का ये इतिहास कुख्यात रहा है कि वे भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ इसी तरह अपने नागरिकों का इस्तेमाल करता रहा है। खबरें तो यहां तक हैं कि फाटा (FATA) और स्वात के इलाकों में 2008-2009 में डिफेंस कमेटी में जो लोग शामिल थे,उन्हें सैलरी भी मिलती थी और तब उन्हें तालिबान की मदद करने के लिए खड़ा किया गया था। खबरों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने मारवात और बेतानी कबीलाइयों को उनके वे हथियार भी फिर से सौंप दिए हैं, जो 2 साल पहले आपसी लड़ाइयों के चलत छीन लिए गए थे।

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पाकिस्तान इस तरह की नाकाम कोशिश पहले कर चुका है

पाकिस्तान इस तरह की नाकाम कोशिश पहले कर चुका है

भारत के लिए सचेत रहने की जरूरत इसलिए है, क्योंकि 1947 में पाकिस्तान ने कश्मीर पर धावा बोलने के लिए कबीलाइयों को ही आगे किया था। उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह हंगामा खड़ा करने की कोशिश की थी कि कश्मीर में लड़ाई पाकिस्तानी सेना नहीं स्थानीय नागरिक लड़ रहे हैं। लेकिन,तब भारतीय सेना के पहुंचने पर पाकिस्तानी सेना की पोल खुल गई और उन्हें कबीलाइयों को लेकर उल्टे पांव मौजूदा जम्मू-कश्मीर छोड़कर भागने को मजबूर होना पड़ा। तब अगर सीज फायर नहीं होता, तो शायद भारतीय सेना पाकिस्तानी कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को भी पूरी तरह अपने कब्जे में ले चुकी होती।

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English summary
pakistan raising tribal militia in khyber pakhtunkhwa against india
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