"मेरी अंतिम सांस भारत की धरती पर हो", पाकिस्तान ने खोली वाघा सीमा तो देश छोड़ते हुए फफक कर रो पड़ीं सईदा
Attari Wagah Border: "मेरी अंतिम सांस भारत की धरती पर हो और हमें यहीं दफनाया जाए", पंजाब के अटारी में बाघा बाॅर्डर पर भारत छोड़ते हुए बुजुर्ग सईदा जगीर फातिमा फफक कर रो पड़ी। शरीरिक रूप से अक्षम सईदा उन पाकिस्तानी नागरिकों में से हैं जिन्हें पाकिस्तान द्वारा बाघा-बाॅर्डर का गेट खोले जाने के बाद वापस भेजा जा रहा था।
पाकिस्तानी के करांची में जन्मीं सईदा और उनकी बहन सईइा सगीर फातिमा दोनों बीते 40 सालों से श्रीनगर में बसी थीं। इनके पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा भी था इन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए कई बार आवेदन किया था लेकिन इन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली जिसके कारण इन्हें पाकिस्तान द्वारा बाघा-बार्डर गेट खोले जाने के बाद आज वापस भेजा गया।

शर्मिन और शकीला बॉर्डर खुलते ही बोलीं- या अल्लाह तेरा करम
शर्मिन और शकीला भी उन्हीं नागरिकों में एक थीं। दो भारतीय बहनें जिनका निकाह पाकिस्तानी पुरुषों से हुआ है और एक दशक से अधिक समय से करांची में रह रही हैं और बाघा बाॅर्डर बंद होने के कारण वे करांची वापस नहीं जा पा री थीं। ये दोनों बहनें 27 मार्च को अपनी गंभीर रूप से बीमार मां से मिलने भारत आई थीं। शकीला और शर्मिन ने कहा गेट बंद देखकर सदमा लग गया था। लेकिन जब पाकिस्तान ने खोला तो अल्लाह का शुक्रिया अदा करने लगीं।
पाकिस्तान ने फिर खोली अटारी में बाघा सीमा
बता दें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में के भारत से भेजे जा रहे पाकिस्तानी नागरिकों के लिए अटारी वाघा-सीमा पर पाकिस्तान ने अपने ही नागरिकों के लिए बंद कर दी थी। जिसके कारण भारत से निकाले गए नागरिक जिसमें मासूम बच्चे महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे वो नो-मैन्स लैंड में फंस गए थे।
हालांकि एक दिन बाद पाकिस्तान ने ये गेट खोल दिया है तो बार्डर पर फंसे लोगों में कुछ के चेहरे खिले हुए थे तो वहीं ऐसे भी नागरिक थे जो दुखी थे। ये वो नागरिक थे जो कई वर्षो से भारत में बसे थे लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद उन्हें उनके देश वापस भेजा गया।
चौंकाने वाली बात ये है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने शुरू में अपने नागरिकों को 29 अप्रैल तक वापस लौटने की अनुमति दी थी लेकिन ये समय सीमा तक अटारी बाघा सीमा पर बंद रही जिसके कारण भारत से भेजे गए पाकिस्तानी नागरिक बार्डर पर फंस गए थे।
भारतीय अधिकारियों ने खुलासा किया था कि पाकिस्तान ने बॉर्डर पर किसी भी पाकिस्तानी नागरिक को सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी। जबकि अफ़गान ट्रकों को भारत में प्रवेश की अनुमति दी गई। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अफ़गानिस्तान के साथ "भाईचारे के संबंधों" का हवाला दिया।












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