Pahalgam Attack पर बड़ा खुलासा, खुफिया इनपुट था, लेकिन स्थान की पहचान में हुई चूक
Pahalgam Attack: खुफिया ब्यूरो (IB) और अन्य एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 19 अप्रैल को प्रस्तावित यात्रा से ठीक पहले पर्यटकों पर संभावित हमले को लेकर सतर्क किया था। हिंदुस्तान टाइम्स के सूत्रों के अनुसार, इस इनपुट के आधार पर श्रीनगर और उसके आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी।
खासकर उन होटलों और पर्यटन स्थलों के पास जहां पर्यटक बड़ी संख्या में आते हैं, जैसे कि श्रीनगर से 22 किलोमीटर दूर डाचीगाम नेशनल पार्क। डाचीगाम नेशनल पार्क जैसे पर्यटन स्थलों के आसपास कड़ी निगरानी की जा रही थी।

घाटी में खराब मौसम के चलते प्रधानमंत्री की ये यात्रा रद्द कर दी गई। इस बीच, आतंकियों ने पहलगाम के बैसरन क्षेत्र में पर्यटकों को निशाना बनाया।
Pahalgam Attack: स्थान की पहचान में हुई चूक
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, "दस में से नौ बार ऐसे अलर्ट बेकार जाते हैं, लेकिन इस बार पर्यटकों को लेकर चेतावनी सही थी। सबसे मुश्किल हिस्सा होता है कि हम सही जगह की पहचान करें इस बार वह गलत हो गई।" उन्होंने पुष्टि की कि सेना और सिविल सुरक्षा बलों को प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान श्रीनगर के निकट किसी पर्यटन स्थल पर हमले की आशंका को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए गए थे।
Pahalgam Attack: यात्रा रद्द होने के बाद भी सतर्क थी एजेंसियां
प्रधानमंत्री कार्यालय ने मौसम विभाग की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए 15 अप्रैल को ही यात्रा रद्द कर दी थी, क्योंकि उन्हें हेलिकॉप्टर से तीन क्षेत्रों में जाना था और मौसम खराब रहने की संभावना थी।
इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता में ढील नहीं दी। पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात चार दिनों तक श्रीनगर में ही डटे रहे। 22 अप्रैल को जब हमला हुआ, तब वह जम्मू में थे और तुरंत श्रीनगर लौटे। उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। HT से बात करने वाले किसी भी अधिकारी ने यह नहीं बताया कि किसी भी इनपुट में पहलगाम या बैसरन का नाम विशेष रूप से दर्ज था।
Pahalgam Attack: बड़े इवेंट की ताक में बैठे थे आतंकी
अब जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यह स्पष्ट है कि आतंकी प्रधानमंत्री की यात्रा रद्द होने का इंतजार कर रहे थे। सबसे बड़ी चूक बैसरन क्षेत्र में संभावित हमले की आशंका न जता पाने की रही, जो साल भर खुला रहता है और केवल अमरनाथ यात्रा के दौरान बंद होता है। एक अधिकारी के अनुसार, "स्थानीय दो आतंकवादियों ने पर्यटकों को एक ओर खदेड़ा, जबकि विदेशी आतंकवादियों ने गोलियां चलाईं। चूंकि इस स्थल पर प्रवेश और निकास एक ही टिकट-निर्धारित स्थान से होता है, पर्यटकों के लिए भागना मुश्किल हो गया।"
अब यह स्पष्ट है कि आतंकी क्षेत्र में पहले से रह रहे थे और अब भी उसी इलाके में सक्रिय हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सबसे बड़ी चूक स्थानीय खुफिया एजेंसियों की थी, जो इस उपस्थिति और योजना को भांपने में नाकाम रहीं। इस बीच, HT से बात करने वाले जमीनी स्तर के सेना अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस प्रकार के किसी भी अलर्ट की जानकारी नहीं थी।
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