2.5 लाख से ज्यादा है सालाना कमाई और छिपाई है ये जानकारी तो इसबार चुकाना होगा 20% इनकम टैक्स

नई दिल्ली- 2.5 लाख रुपये से ज्यादा सालाना कमाई वाले हर इंसान के लिए ये खबर बेहद जरूरी है। आप अभी इनकम टैक्स बचाने और अपने साल भर की इंवेस्टमेंट दिखाने की माथापच्ची में लगे हुए होंगे। लेकिन, हाल ही में इनकम टैक्स के नियमों में एक बड़ा बदलाव आया है। अगर आप इस वक्त नहीं जागे तो आपकी गाढ़ी कमाई का 20% हिस्सा टीडीएस के तौर पर काट लिया जा सकता है। इस संबंध में सीबीडीटी ने कंपनियों और नियोक्ताओं को सख्त हिदायत दिए हैं और नाकाम रहने पर उनपर भी गाज गिर सकती है। नए नियम के मुताबिक जिन लोगों ने अपनीं कंपियों या नियोक्ताओं को पैन और आधार की डिटेल नहीं दिए हैं और उनकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा बनती है तो फिर उनसे 20% के हिसाब से सारा टीडीएस अगली तीन सैलरियों में ही वसूला जा सकता है।

पैन-आधार की डिटेल नहीं दी तो 20% इनकम टैक्स

पैन-आधार की डिटेल नहीं दी तो 20% इनकम टैक्स

अगर आपकी सालाना कमाई 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है और आपने अपनी कंपनी में पैन और आधार की डिटेल्स नहीं जमा कराई है तो आप बड़ी परेशानी में फंस सकते हैं। इनकम टैक्स विभाग ने नियोक्ताओं और कंपनियों से कहा है कि जो कर्मचारी पैन और आधार का डिटेल जमा करने में नाकाम रहते हैं तो उनकी कमाई का 20% बतौर टीडीएस काट लिया जाए। आयकर का यह नया नियम हाल ही में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) ने बनाया है और इसी महीने की 16 तारीख से लागू हुआ है। 86 पन्नों वाले सीबीडीटी के सर्कुलर में साफ कह गया गया है कि कर्मचारियों के लिए आईटी ऐक्ट के सेक्शन 206-एए के तहत पैन-आधार की जानकारी देना अनिवार्य है। सालाना 2.5 लाख रुपये से कम कमाने वालों पर नया नियम लागू नहीं होता है।

एजुकेशन और हेल्थ सेस में मिलेगी राहत

एजुकेशन और हेल्थ सेस में मिलेगी राहत

सर्कुलर में कर्मचारियों से आधार-पैन की जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी नियोक्ता या कंपनियों पर डाली गई है और उनसे साफ कहा गया है कि या तो ये जानकारी मांगें या कर्मचारियों से 20 फीसदी टैक्स काटें। यह नियम 2.5 लाख से ऊपर कमाने वालों से प्राप्त राजस्व पर कड़ी निगरानी रखने के लिए बनाया गया है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2018-19 में इस सेगमेंट से डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 37% के करीब रहा था। हालांकि नए नियम में ये भी बताया गया है कि अगर 20% के दर से टीडीएस काटा जाता है तो फिर उस कर्मचारी से 4% एजुकेशन या हेल्थ सेस की कटौती की जरूरत नहीं पड़ेगी।

टीडीएस का हिसाब समझिए

टीडीएस का हिसाब समझिए

अगर कंपनियां या नियोक्ता आपकी सैलरी से आयकर का हिस्सा काटकर आपको वेतन देती है तो काटी गई उस रकम को टैक्स डिडक्शन ऐट सोर्स (टीडीएस) कहते हैं। अब चालू वित्त वर्ष में सिर्फ तीन महीने की सैलरी ही बची हुई है। यानि अगर आपका टीडीएस नहीं कटा है तो इन्हीं तीन महीनों की सैलरी में आपकी पूरे साल की टैक्स 20% के दर से काटी जाएगी। इसलिए, अगर आपने आधार और पैन का डिटेल्स नहीं दिया है तो फौरन जमा करा दीजिए।

नए सर्कुलर के बाद कैसे कटेगा टीडीएस?

नए सर्कुलर के बाद कैसे कटेगा टीडीएस?

अगर आपकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम रही तो कोई टैक्स नहीं कटेगा। जरूरी कटौतियों के बाद अगर आपकी आय करीब 20% टैक्स के दायरे में आती है तो कंपनियां सालाना आय पर 20% का नियम लागू करेंगी। अगर आपकी सैलरी 30% के आयकर के दायरे में आएगी तो नियोक्ता या कंपनियां टीडीएस उसकी औसत के हिसाब काटेंगी। मसलन, कुल देय टैक्स को सालाना आय से भाग देकर। अगर औसत टैक्स 20% से ज्यादा आता है तो भी टीडीएस 20% के हिसाब से ही कटेगा। हालांकि, उस कर्मचारी से 4% एजुकेशन या हेल्थ सेस की कटौती की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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