'विपक्ष की महिला सांसदों ने घेर ली पीएम मोदी की कुर्सी, मंशा हमला करने की थी', भाजपा ने लगाए गंभीर आरोप
Opposition women MPs surrounded PM Modi: लोकसभा का सत्र बुधवार को विपक्ष के हंगामे की भेट चढ़ गया। शाम पांच बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब में भाषण देने वाले थे लेकिन सदन में हुए जोरदार हंगामे के कारण पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। जिसके कारण पीएम मोदी का संबोधन नहीं हो सका।
विपक्ष की महिला सांसदों ने पीएम की कुर्सी को घेर लिया..
लोकसभा सत्र में बुधवरा को हुए घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि कार्यवाही स्थगित होने पर विपक्षी सदस्य प्रधानमंत्री की सीट तक चढ़ गए थे। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की महिला सांसदों ने पीएम की कुर्सी को घेर लिया, जिनकी मंशा प्रधानमंत्री पर हमला करने की थी। तिवारी ने विपक्षी सदस्यों पर सदन में बवाल मचाने का भी आरोप जड़ा।

'सांसद मारपीट वाले हाव-भाव के साथ आए थे'
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने आगे कहा कि वरिष्ठ मंत्रियों ने हंगामा कर रही महिला सांसदों को शांत करने का प्रयास किया और उनसे वापस लौटने को कहा, यह कहते हुए कि ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री सदन नहीं आ सकते थे। पर, महिला सांसद सुनने को तैयार नहीं थीं। मनोज तिवारी ने यह भी दावा किया कि विपक्ष के सांसद मारपीट वाले हाव-भाव के साथ आए थे।
सांसद हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर ऐसे दौड़ रहे थे
सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दल, चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद राजेश वर्मा ने लोकसभा में हुए हंगामे को लेकर विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष के कुछ सांसद हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर ऐसे दौड़ रहे थे, मानो वे सदन नहीं बल्कि सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हों। वर्मा के मुताबिक, इस व्यवहार से हाथापाई जैसी स्थिति बनने का माहौल पैदा हो गया।
स्थगन के बाद ट्रेजरी बेंच तक पहुंचीं महिला सांसद
राजेश वर्मा ने बताया कि जब सदन की कार्यवाही स्थगित हुई, उसके बाद विपक्ष की कुछ महिला सांसद सत्ता पक्ष की ओर बढ़ने लगीं। वे प्रधानमंत्री की सीट से दो कतार पीछे तक पहुंच गईं और सांसद निशिकांत दुबे की दिशा में आगे बढ़ती रहीं। इस दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव समेत कई मंत्री उन्हें रोकने और समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन वे पीछे हटने को तैयार नहीं थीं।
दीपेंद्र हुड्डा के हस्तक्षेप से शांत हुई स्थिति
वर्मा के अनुसार, हालात उस समय संभले जब कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने सभी सांसदों से संयम बरतने और अपनी-अपनी सीटों पर लौटने की अपील की। उनके हस्तक्षेप के बाद सदन में बना तनाव धीरे-धीरे कम हुआ।
कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने इन आरोपों पर दी प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस की महिला सांसद वर्षा गायकवाड़ ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जोतिमणि, गनीबेन ठाकुर और वे स्वयं निशिकांत दुबे की ओर इसलिए बढ़ीं क्योंकि उन्हें महिलाओं को लेकर की गई उनकी कथित टिप्पणी पर आपत्ति थी। गायकवाड़ ने स्पष्ट किया कि उस समय प्रधानमंत्री सदन में मौजूद नहीं थे।
'निशिकांत इधर आओ' कहने पर बढ़ा तनाव
वर्षा गायकवाड़ के मुताबिक, उन्होंने निशिकांत दुबे से कहा, "निशिकांत क्या बोल रहे थे महिलाओं को लेकर, इधर आओ।" इस पर दुबे वहां से जाने लगे, जिससे उन्होंने कहा, "भाग रहा है, भाग रहा है।" इसी दौरान एनडीए की महिला सांसद भी उस ओर बढ़ने लगीं, जिससे तनाव और बढ़ गया।
अंत में सभी सांसद लौटे अपनी जगह
हालांकि, कुछ समय बाद माहौल शांत हुआ और दोनों पक्षों के सभी सदस्य अपनी-अपनी सीटों पर वापस लौट गए, जिससे स्थिति नियंत्रण में आ सकी।












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