Opinion: तेलंगाना के मंदिरों का लौट रहा है वैभव
तेलंगाना की केसीआर सरकार प्राचीन मंदिरों के गौरव को वापस पाने के लिए 9 साल से कोशिश कर रही है। इसपर 2,500 करोड़ रुपए से अधिक का खर्च हो चुका है और अब उसका असर भी नजर आने लगा है।

तेलंगाना में मंदिरों का कायाकल्प हो रहा है। प्रसिद्ध मंदिरों के विकास पर तो राज्य सरकार जोर दे ही रही है, ऐतिहासिक मंदिरों के जीर्णोद्धार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मंदिरों के साथ-साथ उसकी जमीनों के संरक्षण के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। मंदिरों का विकास हो, इसके लिए उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ाया जा रहा है। जैसे कि सड़कें, होटल और शुद्ध पेयजल की सुविधाएं भी सुलभ की जा रही हैं। पिछले 9 वर्षों में इस तरह के कार्यों में 2,500 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किया जा चुका है। इन प्रयासों का परिणाम ये हुआ है कि जो प्राचीन मंदिर जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच गए थे, उनका वैभव फिर से लौट रहा है।

मंदिरों के विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से हो रहा है काम
तेलंगाना सरकार मंदिरों की भव्यता बरकरार रखने और उसके वैभव की वापसी के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। इस पहल से यदाद्री पहले ही आध्यात्मिक शहर का रूप ले चुका है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो चुकी है। जिस तरह से इस मंदिर का नवीनीकरण किया गया है, उसकी चौतरफा सराहना हो रही है। राज्य सरकार ने कोंडागट्टू अंजनेय स्वामी मंदिर और बसारा मंदिर के भी आधुनिकीकरण के लिए फंड मंजूर किए हैं। यहां गौर करने वाली बात ये है कि यह सब इतने अच्छे ढंग से इसलिए हो पा रहा है, क्योंकि इसपर खुद मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ध्यान दे रहे हैं। मंदिरों के गौरव को फिर से स्थापित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इनके अलावा भी कई सारे मंदिर हैं, जिन्हें बड़े पैमाने पर धन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इस बात पर भी सरकार का जोर है कि दर्शन के लिए इन मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं को हर सुविधा उपलब्ध हो, उन्हें किसी भी तरह से परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

श्रद्धालुओं की संख्या अप्रत्याशित रूप से बढ़ने लगी है
यूं समझ लीजिए कि आज की तारीख में तेलंगाना सरकार प्रदेश में मंदिर पर्यटन का विकास कर रही है, ताकि श्रद्धालुओं को आसानी से देवताओं के दर्शन हो सके। राज्य के यादगिरीगुट्टा, वारंगल, कालेश्वरम, कोंडागट्टू, धर्मपुरी, बसारा, वेमुलावाड़ा आदि मंदिरों में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदाद्री के पुनर्निमाण के बाद से औसतन रोजाना 45,000 से 50,000 श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं। इस तरह से भक्तों की संख्या वेमुलावाड़ा के राजराजेश्वर मंदिर, भद्राद्री के सीतारामचंद्रस्वामी मंदिर, बसारा, धर्मपुरी और कालेश्वरम मंदिरों में भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। हाल ही में सीएम केसीआर कोंडागट्टू मंदिर के उत्थान के लिए एक हजार करोड़ रुपए खर्च करने के लिए तैयार हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि मंदिर का विकास विश्वस्तरीय होना चाहिए।

मंदिरों की जमीनें भी संरक्षित की जा रही हैं
तेलंगाना सरकार राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों का तो विकास कर ही रही है, मंदिरों की जमीन को भी सुरक्षित रखने के लिए कदम उठा रही है। मंदिर की वह जमीन जो एक तरह से बेकब्जा हो चुकी थी, ऐसी लगभग 5,050 एकड़ जमीन को फिर से मंदिर के लिए संरक्षित किया गया है। भविष्य में यह जमीन मंदिर के कब्जे से बेदखल न हो जाए, इसके लिए साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं। मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए, ऑनलाइन सेवाएं भी शुरू की गई हैं। इसपर भक्त पहले से ही पूजा और बाकी धार्मिक कार्यों के लिए बुकिंग कर सकते हैं। अब मंदिर विकास समितियां साझा तौर पर योजनाएं बनाती हैं और कार्यों को संपन्न करवाती हैं। इसके लिए धार्मिक विभाग आवश्यक फंड मंजूर करता है। यही कारण है कि तेलंगाना के मंदिर अब नया स्वरूप लेते जा रहे हैं।













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