Opinion: KTR कैसे बन गए तेलंगाना के ब्रांड एंबेसडर,जानिए सफलता की कहानी ?
तेलंगाना के मंत्री केटीआर को राज्य का ब्रांड एंबेसडर कहा जाता है। इसकी वजह ये है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में हैदराबाद को निवेश का एक महत्वपूर्ण ठिकाना बना दिया। यहां आने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियां लालायित रहती हैं।

केटीआर कहने को तो तेलंगाना के एक मंत्री हैं, लेकिन सत्ताधारी दल बीआरएस के नेता उन्हें भविष्य के मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं। इसके पीछे की कुछ खास वजहें भी हैं,जैसे केटीआर मंत्री पद पर रहते हुए तेलंगाना के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर काम कर रहे हैं। राज्य के विभाजन के बाद से मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने बहुत ही रणनीतिक तरीके से कैबिनेट के अहम विभागों को उनके हाथों में सौंपा हुआ है। उन्हें हैदराबाद की छवि और भी बेहतर करने की जिम्मेदारी दी गई। सब जानते हैं कि हैदराबाद राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के लिए कितना महत्वपूर्ण है। आईटी के विस्तार से लेकर,निवेश को लुभाने तक में केटीआर की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका रही है,ये निवेश के आंकड़ों से पूरी तरह से स्पष्ट है। पिछले 8 वर्षों में तेलंगाना में 47 अरब डॉलर का निवेश हुआ है। 21 लाख लोगों को सीधा रोजगार प्राप्त हुआ है।

जहां जैसी जिम्मेदारी, वहां उसी तरह से फिट बैठते हैं केटीआर
राजनीति में निचले पायदान से शुरू करने वाले नेताओं के पास अपनी ठसक दिखाने के लिए यह बड़ा आसान होता है कि वह लोगों को यह एहसास कराएं कि वे कौन हैं? लेकिन, केटी रमा राव के भाषणों में 'मैं' शब्द का प्रभाव नहीं दिखता। वे हमेशा तेलंगाना सरकार या केसीआर की सरकार कहते हैं। राजनीतिक रूप से भी केटीआर की स्टाइल अलग है। आईटी मंत्री के रूप में जब उन्हें किसी चीज की समीक्षा करनी होती है और किसी करार या सेमिनार में भाग लेना होता है, तो उनका बर्ताव एक शिक्षित शख्सियत और जिम्मेदार मंत्री वाला होता है। लेकिन, वही अगर लोगों के बीच पार्टी के एक नेता के रूप में पहुंचते हैं तो बहुत ही सुलझे हुए राजनेता मालूम पड़ते हैं। 2018 से ही केसीआर दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक कॉन्फ्रेंस में शामिल हो रहे हैं। वे तेलंगाना में निवेश के लिए कई देशों और शहरों की यात्रा कर चुके हैं। राज्य के विभाजन के बाद से हैदराबाद में जो निवेश हुआ है....उससे शहर में बदलाव दिखता है और यह अब सभी को आकर्षित कर रहा है।

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8 वर्षों में 47 अरब डॉलर का निवेश
तेलंगाना के गठन के बाद से अबतक राज्य में 47 अरब डॉलर का निवेश हो चुका है। लगभग 80 फीसदी कंपनियों में कामकाज भी शुरू हो चुका है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में लगभग 21 लाख लोगों को रोजगार के मौके मिले हैं। लेकिन, इन आठ वर्षों में दूसरे राज्यों की तरह प्रदेश में वाइब्रेंट सम्मलेन नहीं कराने पड़े हैं। सौदों के लिए कोई जल्दीबाजी नहीं दिखानी पड़ती है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बातचीत करके योजना बनाई जाती है और उनके साथ समझौतों के माध्यम से निवेश आकर्षित करने की कोशिश की जाती है। सिर्फ तेलंगाना में ही कंपनियां अपना कामकाज सेल्फ-डेक्लरेशन के साथ शुरू कर सकती हैं। विश्व में जितनी भी वैक्सीन बनती हैं, उनकी 33 फीसदी तेलंगाना में ही उत्पादित होती हैं। अमेरिका के एफडीए से मंजूरी लेने वाली अधिकतर कंपनियां तेलंगाना में हैं। हाल ही में केटीआर ने जानकारी दी है कि दावोस में तेलंगाना को 21 हजार करोड़ का निवेश मिला है। उनके मुताबिक वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम कॉन्फ्रेंस की चार दिवसीय यात्रा सफल रही है। मंत्री का कहना है दावोस में उन्होंने कुल 52 ट्रेड मीटिंग, 6 राउंड टेबल मीटिंग और दो पैनल डिस्कशन में भाग लिया है।

हैदराबाद बन चुका है इंवेस्टमेंट डेस्टिनशन
हैदराबाद में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करना पिछले आठ वर्षों में राज्य सरकार की प्राथमिकता रही है। हैदराबाद को लेकर केटीआर की सोच दिलचस्प रही है। हैदराबाद में हैदराबाद के बारे में बात करते वक्त, वे कहते हैं 'हैदराबाद दक्षिण और उत्तर भारत का मेल है। इसलिए आपको डोसा और रोटी दोनों ही मिली सकती हैं। टेक्नोलॉजी की बायोलॉजी के साथ दोस्ती है। यह डेटा साइंस को लाइफ साइंस के साथ जोड़ता है। यह हर चीज का हब है, मैंगो-वर्स से मेटा-वर्स तक।' 16 हजार करोड़ के निवेश के साथ टेक्नोलॉजी की बड़ी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट हैदराबाद में तीन और डेटा सेंटर तैयार कर रही है। भारती एयरटेल ग्रुप भी हैदराबाद में करीब 2 हजार करोड़ के निवेश के साथ विशाल हाइपरस्केल डेटा सेंटर का निर्माण करेगी। जीनोम वैली में यूरोफिंस नाम की फार्मा कंपनी एक हजार करोड़ रुपए की लागत से स्टेट-ऑफ-द-आर्ट लैबोरेटरी कैंपस तैयार कर रही है। केटीआर ने कहा है कि इनके अलावा पेप्सिको, P&G,एलॉक्स, अपोलो टायर्स लिमिटेड, वेब पीटी, इंस्पायर ब्रांड्स जैसी अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भी 2 हजार करोड़ रुपए के निवेश की घोषणाएं की हैं।













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