OPINION: तेलंगाना में किसकी सरकार? ताजा सर्वे के चौंकाने वाले नतीजे, हवा का रुख बदलने का संकेत

तेलंगाना में मतदान के अब एक महीने से भी कम रह गए हैं। सभी पार्टियां लोगों को अपनी ओर खींचने के लिए पूरा जोर लगा रही हैं। चुनाव प्रचार घनघोर तरीके से जारी है। मतदाताों के मन में क्या चल रहा है, यह टटोलने के लिए सर्वे करने वाली एजेंसियां भी मैदान में हैं। वैसे लोगों के बीच इस तरह की बातें बताई जा रही हैं कि मुकाबला कांग्रेस और बीआरएस के बीच में है।

कांग्रेस को उम्मीद है कि कर्नाटक की तरह तेलंगाना में भी अबकी बार उसकी किस्मत का ताला खुलने जा रहा है। वहीं बीआरएस को लग रहा है कि राज्य के गठन के बाद से वह लोगों की उम्मीदों के मुताबिक शासन कर रही है, इसलिए उसे तीसरी बार सरकार बनाने का मौका जरूर मिलेगा।

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तेलंगाना में कांग्रेस नेताओं का जोश हाई है!
कुछ समय पहले तक तेलंगाना की जो राजनीति बीजेपी और बीआरएस के बीच बंटी हुई नजर आ रही थी, लगता है कि भाजपा की आंतरिक वजहों से फिलहाल उससे कांग्रेस को फायदा मिलता नजर आ रहा है। कांग्रेस की ओर से गारंटियों की घोषणा उसकी पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से हुई है। पार्टी नेताओं का आत्मविश्वास चरम पर है कि यह सत्ता में काबिज होने की गारंटी बनेगी। राज्य में उम्मीदवारों के चयन से लेकर घोषणापत्र तक में दिल्ली का दखल नजर आ रहा है। वहीं बीआरएस की ओर से सीएम केसीआर और उनकी टीम चुनाव अभियान की कमान संभाल रही है।

तेलंगाना में बीआरएस को बड़ी बहुमत-चुनाव-पूर्व सर्वे
राज्य में इस समय कई एजेंसियां चुनाव-पूर्व सर्वे में भी लगी हुई हैं। इसी दौर में श्री आत्मसाक्षी का एक ताजा सर्वे आया है, जिसने चुनाव नतीजों को लेकर दिलचस्पी और बढ़ा दी है। इस सर्वे का अनुमान है कि तेलंगाना की 119 सीटों में से सत्ताधारी बीआरएस के खाते में 64-70 सीटें जाएंगी। इसके मुताबिक सत्ताधारी दल को इस चुनाव में 42.5% वोट शेयर मिलेगा। यह हाल में आए कुछ ओपिनियन पोल से अलग है, जिसमें भारत राष्ट्र समिति को भारी बहुत दिखाया गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि इस सर्वे में 28 अक्टूबर तक के आंकड़े जोड़े गए हैं।

तेलंगाना में बीजेपी चौथे नंबर पर रह सकती है- सर्वे
दूसरे स्थान पर कांग्रेस है, जिसे 36.5% वोट शेयर के साथ 37 से 43 सीटें मिलने की संभावना है। वहीं बीजेपी को मुश्किल से 5 से 6 सीटें मिलती दिख रही हैं और उसका वोट शेयर 10.75% रहने का अनुमान है। एआईएमआईएम को सिर्फ 2.75% वोट शेयर के बावजूद 6 से 7 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गई है। इस सर्वे के अनुसार 6 सीटों पर कांटे की टक्कर है। लेकिन, इनमें से 3 पर बीआरएस, 2 पर कांग्रेस और एक पर बीजेपी को बढ़त मिलने की संभावना है।

बीआरएस के पक्ष में हवा बदलने की वजह?
मतदान में एक महीने से भी कम रह गए हैं। ऐसे में इस सर्वे को हालातों से जोड़ें तो कुछ चीजें स्पष्ट हो सकती हैं। जैसे सीएम केसीआर पूरी गंभीरता और ईमानदारी से अपने अभियान में जुटे हुए हैं। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्रों की समझ, स्थानीय हालातों और मुद्दों की जानकारी और सभी तरह के समीकरणों पर नजर उनकी स्थिति को बेहतर बना रहा है। वह लोकल मुद्दों की बदौलत वोटरों को बीआरएस के पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस के जिन नेताओं को टिकट नहीं मिला है, केटीआर और हरीश राव उनके पास जाकर उन्हें पार्टी से जुड़ने का निमंत्रण दे चुके हैं। कांग्रेस नेताओं का जोश तो चरम पर है। लेकिन, अब यह फैक्टर काम कर रहा है कि लोकल स्तर पर वे क्या मुद्दे हैं, जो मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं। भाजपा ने पिछड़ा वर्ग को बड़ा मुद्दा बनाया है।

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