जहांगीर भाभा को ले जा रहे विमान के क्रैश के पीछे CIA का हाथ?
नई दिल्ली। साल 1966 में फ्रांस के आल्प्स के पास एयर इंडिया का विमान बोइंग 707 क्रैश हो गया था। इस हादसे में 117 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में भारत के महान वैज्ञानिक होमी भाभा भी शामिल थे। अब एक न्यूज वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में कथित तौर पर इस बात का संकेत दिया है कि प्लेन क्रैश में अमेरिकी खुफिया एजेंसी का हाथ था।

क्या है वेबसाइट के इस रिपोर्ट में
TBRNews.org नाम की वेबसाइट की रिपोर्ट में अब होमी जहांगीर भाभा से जुड़ी यह जानकारी सामने आ रही है। दरअसल इस वेबसाइट ने 11 जुलाई 2008 को एक पत्रकार ग्रेगरी डगलस और सीआईए के अधिकारी रॉबर्ट टी क्राओली के बीच हुई कथित बातचीत को फिर से पेश किया है।

क्या कहा था सीआईए के अधिकारी ने
इस बातचीत में सीआईए अधिकारी रॉबर्ट के हवाले से कहा गया है, 'हमारे सामने समस्या थी, आप जानते हैं, भारत ने 60 के दशक में आगे बढ़ते हुए परमाणु बम पर काम शुरू कर दिया था।' रॉबर्ट बातचीत के दौरान रूस का भी जिक्र करते हैं जो कथित तौर पर भारत की मदद कर रहा था।

अधिकारी ने कही बम विस्फोट की बात
इसके बाद इस बातचीत में होमी जहांगीर भाभा का जिक्र आता है। भाभा का उल्लेख करते हुए सीआईए अधिकारी ने कहा, 'मुझपर भरोसा करो, वह खतरनाक थे। उनके साथ एक दुर्भाग्यपूर्ण ऐक्सिडेंट हुआ। वह परेशानी को और अधिक बढ़ाने के लिए वियना की उड़ान में थे, तभी उनके बोइंग 707 के कार्गो में रखे बम में विस्फोट हो गया।'

भाभा ने किया था परमाणु बम बनाने का ऐलान
अक्टूबर 1965 में भाभा ने ऑल इंडिया रेडियो से घोषणा की थी कि अगर उन्हें छूट मिले तो भारत 18 महीनों में परमाणु बम बनाकर दिखा सकता है। एक एक्सपर्ट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भाभा इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि अगर भारत को ताकतवर बनना है तो ऊर्जा, कृषि और मेडिसिन जैसे क्षेत्रों के लिए शांतिपूर्ण नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम शुरू करना होगा। इसके अलावा भाभा यह भी चाहते थे कि देश की सुरक्षा के लिए परमाणु बम भी बने। हालांकि यह उनका छिपा हुआ अजेंडा था। प्लेन क्रैश में भाभा की मौत हो गई लेकिन आगे चलकर उनका सपना तब पूरा हुआ जब भारत ने 18 मई 1974 को पोखरण में अपने पहले परमाणु बम का सफल परीक्षण किया। इस बम का कोड नाम था 'स्माइलिंग बुद्ध'।












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