Trishul: टू फ्रंट वार के लिए भारत कितना तैयार? 11 दिन में बताएगा IAF का ऑपरेशन 'त्रिशूल'
चांद पर कदम रखने के बाद एक बार फिर भारत दुनिया को हैरत में डालने वाला है। दुश्मनों के लिए काल त्रिशूल ऑपरेशन के अभ्यास के दौरान जी-20 समिट में भारत आने वाले मेहमान भी भारत की वायु ताकत का अंदाजा नहीं लगा पाएंगे।
भारतीय वायु सेना का मेगा युद्धाभ्यास 'त्रिशूल' ऐसे वक्त पर हो रहा है, जब भारत में जी-20 समिट के दौरान दुनियाभर के बड़े नेता राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली में मौजूद होंगे। वायुसेना की ये एक्सरसाइज उत्तरी क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर होगी। जिसमें राफेस, मिराज, सुखोई 30MKI समेत तमाम लड़ाकू विमान शामिल होंगे।
11 दिन तक चलने वाली ऑपरेशन त्रिशूल के तहत युद्धाभ्यास में कई बड़े लड़ाकू विमान शामिल होंगे। इस मेगा एक्सरसाइज में चिनूक और अपाचे समेत कई हेलिकॉप्टर भी आसमान में दमखम दिखाएंगे। भारत के धरती से चांद पर कदम रखने के बाद ये पहली वायु ताकत प्रदर्शन होगा जिसका हिस्सा विशेष बल गरूड़ भी बनेगा। वायुसेना के इस अभ्यास की एक बड़ी वजह भी है और ये कि जी-20 के दौरान भारत के मारक हथियारों को पूरी तरह तैयार रखना।

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में मेक-इन इंडिया के तहत डिफेंस क्षेत्र में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके जरिए भारत रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह अपने पिछले कई संबोधनों में इसका जिक्र भी कर चुके हैं। ऐसे में ऑपरेशन त्रिशूल के दौरान दुश्मन देशों के छक्के छूटने वाले हैं।
टू फ्रंट वार की दिखेगी ताकत
'त्रिशूल' युद्धाभ्यास 4 सितंबर से 14 सितंबर तक लद्दाख, हिमाचल प्रदेश जम्मू कश्मीर और पंजाब में आयोजित किया जाएगा। वायुसेना एलएसी से एलओसी तक अपने लड़ाकू विमानों की क्षमता का प्रदर्शन करेगी। दरअसल, भारत के पास एक साथ कई देशों से लड़ने की क्षमता है। एलएसी से एलओसी तक अभ्यास के जरिए भारत चाइना और पाकिस्तान के साथ एकसाथ दो- दो हाथ करने के लिए अपनी वायु ताकत दिखाएगी।
पाकिस्तान को मिर्ची
इस बीच भारतीय वायुसेना के युद्धाभ्यास से पाकिस्तान को मिर्ची लग रही है। पाकिस्तान ने इससे पहले एक बयान में कहा था कि अमेरिका द्वारा भारत को अत्याधुनिक हथियार देना दक्षिण एशियाई क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता और पारंपरिक संतुलन को कमजोर करेगा। भारत ज्यादा उत्साहित होगा जबकि उसकी वजह से पाकिस्तान के सुरक्षा हित भी खतरे में पड़ जाएंगे। बता दें कि भारत की अमेरिका के साथ हुई डील की बात करें तो अमेरिका की GE एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच एक अहम करार हुआ है। इस डील के तहत GE एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) लड़ाकू जेट इंजन तैयार करने का पूरा प्लान है।
कहां- कहां होगा वायुसेना का अभ्यास
चीन और पाकिस्तान दोनों की सीमाओं के साथ उत्तरी क्षेत्र में वायुसेना अभ्यास करेगी। इस एक्सरसाइज का नाम 'त्रिशूल' रखा गया है। भारतीय वायु सेना के अधिकारी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस मेगा अभ्यास में राफेल, मिराज 2000 और सुखोई-30 भाग लेंगे। इसके साथ चिनूक और अपाचे सहित भारी-लिफ्ट परिवहन विमान और हेलिकॉप्टरों के साथ अभ्यास में भाग लेंगे। गरुड़ विशेष बल भी इस अभ्यास का हिस्सा है। वायुसेना लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब सहित उत्तरी क्षेत्र में चार से 14 सितंबर तक युद्धाभ्यास कर रही है।












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