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Operation Blue Star:पहले अलग राज्‍य, फिर अलग राष्‍ट्र, ऐसे शुरू हुआ था खालिस्‍तान मूवमेंट

Operation Blue Star:पहले अलग राज्‍य, फिर अलग राष्‍ट्र, ऐसे शुरू हुआ था खालिस्‍तान मूवमेंट

नई दिल्ली। ऑपरेशन ब्लू स्टार स्वतंत्र भारत के इतिहास में देश के भीतर सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई में गिना जाता है, इसको ऑपरेशन को लेकर कई तरह के मत रहे हैं और कई तरह के दावे भी लगातार होते रहे हैं। ये ऑपरेशान 3 से 6 जून 1984 तक चला था। इसको 34 साल हो रहे हैं। ऑपरेशन ब्लू स्टार के पीछे खालिस्तान की मांग और इसके खालिस्तान समर्थकों का स्वर्ण मंदिर में अड्डा बना लेना माना जाता है। आइए बताते हैं कि ये मूवमेंट आखिर देश में किस तरह से शुरू हुआ था।

blue star

1947 में आजादी के बाद पंजाब, भारत और पाकिस्तान के बीच बंट गया। भारत में आज के हरियाणा, हिमाचल प्रदेश को मिलाकर एक राज्य बना। सिखों के प्रभुत्व वाली पार्टी अकाली दल की ओर से अलग पंजाब की मांग उठने लगी। लंबे विरोध प्रदर्शनों के बाद 1966 में पंजाब को पंजाबी बोलने वाले पंजाब, हिंदी बोलने वाले हरियाणा, पहाड़ी बोलने वाले हिमाचल प्रदेश में विभाजित कर दिया।

राज्य बनने के बाद धीरे-धीरे पंजाब को खालिस्तान नाम से अलग देश बनाने की मांग उठने लगी जिसे खालिस्तान आंदोलन का नाम दिया गया। इस आंदोलन में जरनैल सिंह भिंडरावाला के आगे आने के बाद उसकी लोकप्रियता बढ़ने लगी और आंदोलन हिंसक होता गया। 1980 आते-आते पंजाब में हिंसा की वारदातें आम हो गई। 1983 में डीआईजी अटवाल की स्वर्णमंदिर परिसर में ही हत्या कर दी गई, इसके बाद स्वर्ण मंदिर भिंडरावाला का ठिकाना बन गया। भिंडरावाला के साथ सैकड़ों हथियारबंद लड़ाके रहते, मंदिर में ही हथियार इकट्ठा किए जाने लगे। मंदिर किसी मोर्चे के लिए तैयार किया जाने लगा।

भिंडरावाला ने एक तरह से भारत सरकार के खिलाफ जंग का सा माहौल बनाना शुरू कर दिया। तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के लिए ये बड़ी चुनौती बन गया था, दुनियाभर में भिंडरावाला की चर्चा उस समय थी। मंदिर से कैसे उसे निकाला जाए, इसको लेकर सरकार परेशान थी। कुछ ऑपरेशन के लिए कमांडो को ट्रेनिंग भी दी गई लेकिन फिर वो कैंसिल कर दिए गए। ने कई कोशिशें की स्वर्ण मंदिर से निकालने की तैयारी की जाने लगी

आखिर में इंडियन आर्मी ने स्वर्ण मंदिर में 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' करने का फैसला किया। इसके तहत स्वर्ण मंदिर में सेना को घुसकर भिंडरावाला और उसके साथियों को खत्म करना था। ऑपरेशान एक जून 1984 को शुरू हुआ। 1 से 3 जून तक 1984 के बीच पंजाब की रेल, रोड और हवाई ट्रांसपोर्ट सर्विस को रोक दिया गया। स्वर्ण मंदिर में पानी और बिजली की सप्लाई काट दी गई। स्वर्ण मंदिर के भीतर सेना गई भारी गोलीबारी के बाद जरनैल सिंह भिंडरवाला का शव बरामद कर लिया गया। 7 जून 1984 को स्वर्ण मंदिर पर आर्मी का कंट्रोल हो गया।

इस कार्रवाई में बहुत से लोग मारे गए, अकाल तख़्त पूरी तरह तबाह हो गया, ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सिख पुस्तकालय जल गया। भारत सरकार के श्वेतपत्र के अनुसार 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल हुए। इसी श्वेतपत्र के अनुसार 493 खालिस्तानी लड़ाके और आम नागरिक मारे गए, 86 घायल हुए और 1592 को गिरफ़्तार किया गया। सिख संगठनों कहते रहे हैं कि हजारों श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद थे और मरने वाले निर्दोष लोगों की संख्या भी हजारों में थी।

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