'One Nation- One Election' समित जल्द सौंपेगी रिपोर्ट, जानिए पहली बैठक पर क्या बोले पूर्व राष्ट्रपति कोविंद
केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाने के साथ ही वन नेशन- वन इलेक्शन को लेकर समिति गठित कर दी थी। इस समिति के अध्यक्ष पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को बनाया गया है। शनिवार के मीडिया के सामने पूर्व राष्ट्रपति समिति की पहली बैठक का ऐलान किया। वहीं दूसरी ओर दावा किया जा रहा है कि 18 सितंबर से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र के दौरान 'एक देश एक चुनाव' का बिल संसद में पेश किया जा सकता है। ऐसे में दावा किया जा रहा है कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' को लेकर गठित समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंप सकती है।
केंद्र सरकार की ओर 'वन नेशन- वन इलेक्शन को लेकर गठित कमेटी में कुल आठ सदस्य हैं। इस कमेटी के अध्यक्ष भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बनाए गए हैं। शनिवार को जब मीडिया ने उनसे समिति के कार्यों को लेकर सवाल पूछे तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कमेटी 23 सितंबर को पहली बैठक करने जा रही है।

#WATCH | On the 'One Nation, One Election' committee, former President and chairman of the committee, Ram Nath Kovind says "The First meeting will take place on 23rd September" pic.twitter.com/FU1gvzMi7j
— ANI (@ANI) September 16, 2023
संसद के विशेष सत्र के दौरान वन नेशन वन इलेक्शन समिति की बैठक अहम मानी जा रही है। दावा किया जा रहा है कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समति के एक देश- एक चुनाव से जुड़े अहम बिंदुओं पर चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को जल्द पेश कर सकती है।
'एक देश एक चुनाव' समिति की अध्यक्षता कर रहे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पीएम मोदी का सबसे भरोसेमंद माना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति जटिल कानूनी मामलों को आसानी से संभाल सकते हैं। उन्होंने पिछले दिनों केंद्रीय कानून मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति से जुड़े कामों को लेकर मुलाकात की थी। दावा ये भी किया गया कि पूर्व राष्ट्रपति बीते तीन महीनों में कम से कम 10 राज्यपालों से मुलाकात कर चुके हैं।
'एक देश एक चुनाव' बिल से विपक्ष क्यों परेशान?
अगर एक देश एक चुनाव होते हैं, तो गठबंधन में शामिल दलों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ होना टीएमसी, कांग्रेस समेत वाम दलों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। इसके अलावा ऐसी ही स्थिति आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच हो सकती है।












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