कोरोना के नए वेरिएंट ऑमिक्रॉन से वैक्सीन ले चुके लोगों को भी खतरा : AIIMS
नई दिल्ली, 28 नवंबर। दुनियाभर में हड़कंप मचाने वाले कोरोना वायरस के नए वेरिएंट 'ऑमिक्रॉन' को लेकर भारत भी अलर्ट मोड पर आ गया है। रविवार को केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में ओमिक्रॉन के संभावित खतरे को टालने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। इसी क्रम में अब नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रमुख डॉ. रणदीप गुलेरिया ने भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कोरोना के नए वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन की प्रभावशीलता को लेकर चिंता व्यक्त की।

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एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने रविवार को चेतावनी दी कि नए कोविड वेरिएंट ऑमिक्रॉन में स्पाइक प्रोटीन क्षेत्र में 30 से अधिक उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) हुए हैं। इसलिए इसकी संभावना अधिक है कि कोविड वैक्सीन द्वारा शरीर में तैयार की गई एंटीबॉडीज को भेदकर यह शरीर में संक्रमण फैला सकता है। बता दें कि कोरोना वायरस के इस खतरनाक वेरिएंटा पता पहली बार दक्षिण अफ्रीका लगा, जिसके बाद दुनिया के कई देशों ने नए सिरे से यात्रा प्रतिबंधों की घोषणा के साथ अलर्ट जारी कर दिया है। एम्स प्रमुख ने कहा कि स्पाइक क्षेत्र में कई म्यूटेशन शरीर के अंदर टीकों की प्रभावशीलता को कम कर सकते हैं।
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डॉ गुलेरिया ने कहा, 'कोरोना वायरस के नए वेरिएंट में स्पाइक प्रोटीन क्षेत्र में कथित तौर पर 30 से अधिक उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) हुए हैं और इसलिए इसमें इम्यूनोस्केप तंत्र विकसित करने की क्षमता है। अधिकांश वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ एंटीबॉडी बनाती हैं। इसलिए स्पाइक प्रोटीन क्षेत्र में इतने सारे उत्परिवर्तन कोविड-19 टीकों की कम प्रभावकारिता का कारण बन सकते हैं। स्पाइक प्रोटीन की उपस्थिति मेजबान कोशिका में वायरस के प्रवेश की सुविधा प्रदान करती है और इसे संक्रमणीय बनाने और संक्रमण पैदा करने के लिए भी जिम्मेदार है। हमें यह देखना होगा कि भारत में प्रयुक्त होने टीकों की प्रभावशीलता कितनी है और उसका गंभीर मूल्यांकन करने की जरूरत है।'












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