उमर अब्दुल्ला का नरेंद्र मोदी पर पलटवार, कहा-इतिहास पढ़ें पीएम मोदी
नई दिल्ली- नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में सद्र-ए-रियासत (राष्ट्रपति) एवं वज़ीर-ए-आज़म (प्रधानमंत्री) वाले अपने बयान का बचाव करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को इतिहास पढ़ने की नसीहत दे डाली है। उन्होंने मंगलवार को अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह इतिहास पढ़ना चाहिए कि जम्मू एवं कश्मीर भारत का हिस्सा कैसे बना।

उमर की नसीहत
कश्मीर के पट्टन शहर की एक रैली में उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी से कहा कि, "मोदी साहब, आपको इस देश का इतिहास पढ़ना चाहिए कि किन परिस्थितियों में जम्मू एवं कश्मीर भारत का हिस्सा बना था। जम्मू एवं कश्मीर में पीएम और सद्र-ए-रियासत की मांग नई नहीं है। यह हमारे संविधान में है जिसकी प्रधानमंत्री ने शपथ ली है, वही संविधान हमें अलग नक्शा, झंडा और एक अलग संविधान देता है।" बाद में उन्होंने यह भी कहा कि 1965 तक जम्मू-कश्मीर का अपना प्रधानमंत्री और सद्र-ए-रियासत होता था और उन्होंने जो कहा वह संविधान का हिस्सा है। उन्होंने कहा जब वे अटल जी की सरकार में मंत्री थे तब भी इस मुद्दे पर उनका यही स्टैंड था। उस समय भी वे राज्य की स्वायत्तता और 1953 से पहले वाली स्थिति की मांग करते थे। उन्होंने कहा है कि वे जम्मू एवं कश्मीर के भारत में शामिल होने की शर्तों को पूरा करवाना चाहते हैं। गौरतलब है कि कश्मीर के लिए उनकी ओर से 'प्रधानमंत्री' पद की बात करना पीएम नरेंद्र मोदी को नागवार गुजरा था और उन्होंने इसे खारिज करते हुए कहा था कि उनके जीते जी कोई भी भारत को बांट नहीं सकता।

उमर के निशाने पर बीजेपी
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने बीजेपी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा है कि वे राज्य के विशेष दर्जे पर प्रहार कर रहे हैं। पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फेसबुक पर अनुच्छेद 35ए (Article 35A) को हटाने की बात उठाई, फिर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा कि अनुच्छेद 35ए (Article 35A) को खत्म करना पार्टी का पुराना वादा है। उन्होंने कहा कि अब पीएम मोदी ने उनके बयान का जिक्र करके उसे देश और विदेश में मशहूर कर दिया है।

अनुच्छेद 35ए (Article 35A) क्या है?
भारतीय संविधान में अनुच्छेद 35ए (Article 35A) के तहत जम्मू एवं कश्मीर को कुछ खास सुविधाएं मिली हुई हैं। इसके अनुसार वहां के 'स्थानीय निवासियों' को कुछ विशेषाधिकार प्राप्त हैं, जिससे कश्मीर के बाहर के लोगों को वंचित रखा गया है। इसी के चलते राज्य के बाहर का कोई व्यक्ति वहां स्थायी रूप से निवास नहीं कर सकता। यही नहीं अगर स्थानीय लड़की राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति से शादी कर लेती है, तो उसका भी अधिकार छिन जाता है। बीजेपी संविधान की इसी धारा को खत्म करने की मांग कर रही है। फिलहाल ये मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में है।












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