क्या मोहन चरण 'मांझी' हैं इसलिए हो रहा है विवाद? 5-स्टार में जाते रहें हैं कई सीएम
Mohan Charan Manjhi Controversy: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी की हालिया दिल्ली और मुंबई यात्रा को लेकर विपक्षी दलों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उच्च स्तरीय इन्वेस्टर्स मीट में भाग लेने गए मांझी के 5-स्टार होटल और प्रेसिडेंशियल सुइट्स में ठहरने को लेकर उन्हें फिजूलखर्ची और दिखावे का प्रतीक बताने की कोशिश हो रही है।
लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। सीएम वहां न तो शौक से गए थे ना ही दिखाबे के लिए, बल्कि जरूरत, प्रोटोकॉल और राज्य के सम्मान से जुड़ी जिम्मेदारी के लिए गए थे।

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इस तरह की आधिकारिक यात्राएं किस प्रकार की होती हैं। जब कोई मुख्यमंत्री देश के प्रमुख उद्योगपतियों, कंपनियों के सीईओ और निवेशकों से मिलते हैं, तो उस बातचीत का माहौल भी उतना ही उच्च स्तर का होना चाहिए। यह सिर्फ होटल में रुकने की बात नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित और मर्यादित माहौल तैयार करने की बात है, जिसमें निवेश और नीति पर गंभीर चर्चाएं हो सकें।
राज्य सरकार के सूत्रों के मुताबिक, प्रेसिडेंशियल सुइट्स या उच्च श्रेणी के कमरे किसी व्यक्तिगत विलासिता के लिए नहीं थे। बल्कि ये मीटिंग्स और बैठकों के लिए सुरक्षित व गोपनीय स्थान थे। इसे महज ऐशो-आराम के रूप में पेश करना न केवल भ्रामक है, बल्कि राजनीतिक बदनीयती का संकेत भी देता है।
लेकिन असली सवाल यह है कि आलोचना का निशाना सिर्फ मोहन मांझी ही क्यों? क्या इसलिए कि वे किसी अभिजात्य वर्ग से नहीं आते? क्या कुछ लोगों को यह असहज लग रहा है कि एक साधारण आदिवासी पृष्ठभूमि से आया व्यक्ति जो कभी समाज के सबसे गरीब तबकों में गिना जाता था, अब मुख्यमंत्री बनकर 5-स्टार होटल में राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहा है?
यह आलोचना कहीं न कहीं वर्गभेद की गंध देती है। वही वर्गभेद जो तब चुप रहता है जब विपक्षी बीजेडी के नेताओं द्वारा यही सब किया जाता है। तब कोई सवाल नहीं उठता, कोई समाचार की सुर्खी नहीं बनती।
हकीकत यह है कि कुछ लोग अब भी एक आदिवासी व्यक्ति को शीर्ष पर देख नहीं पा रहे हैं। उन्हें तकलीफ है कि कोई गरीब, सिर्फ आर्थिक रूप से नहीं बल्कि गरिमा और हक की दृष्टि से भी ऊंचा उठ रहा है।
इन नाहक आक्रमणों का कारण मुख्यमंत्री मांझी का अब तक का कार्यकाल खुद है। उन्होंने पिछली सरकार की कई ऐसी योजनाओं को पूरा किया है, खासकर जनजातीय कल्याण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं में। वह "जनता के मुख्यमंत्री" के रूप में जाने जाते हैं, सरल, सहज और सेवा-भाव से प्रेरित। शायद विपक्ष को ज्यादा मिर्ची इसीलिए लगी है।












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