महासागरों में रहस्यमय Twilight zone क्या हैं, वैज्ञानिकों को है 1,00,000 नई प्रजातियों की तलाश?
हमारे महासागर रहस्यों से भरे पड़े हैं। अभी भी लाखों प्रजातियों के बारे में हमें कुछ भी पता नहीं है। वैज्ञानिक ऐसी ही लाखों प्रजातियों की तलाश की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल एक लाख का लक्ष्य रखा है।

हमारे महासागर रहस्यों से भरे पड़े हैं। अगर अंतरिक्ष के बारे में हमें अभी भी बहुत कम जानकारी है तो महासागर के बारे में भी हम उतने ही अज्ञात हैं। इसीलिए वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं और पृथ्वी के दो-तिहाई से बड़ी दुनिया के बारे में खोज में लगे हुए हैं। फिलहाल उनकी कोशिश उन एक लाख प्रजातियों को खोजना है, जिनके बारे में पता चलने की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

महासागरों में 22 लाख प्रजातियों की संभावना
वैज्ञानिक मानते हैं कि महासागरों में 22 लाख से भी ज्यादा समुद्री प्रजातियां मौजूद हैं, जिनमें से महासागर जनगणना (Ocean Census) से अभी तक अनुमानित रूप से 2,40,000 प्रजातियों का ही पता चल पाया है। अगर दूसरे शब्दों में कहें तो हमारे महासागर हमारे लिए उतने ही अज्ञात हैं, जितने कि हमारे सोलर सिस्टम में मौजूद हमसे बेहद दूर अनगिनत चंद्रमाएं।

10 वर्षों में एक लाख नई प्रजातियों की खोच की कोशिश
सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले 10 वर्षों में वैश्विक पहल से इनमें से 1,00,000 अज्ञात प्रजातियों को खोजने की कोशिश है। हमारी पृथ्वी का 70% से अधिक हिस्सा पानी से भरा हुआ है, ऐसे में इस विशाल संख्या में प्रजातियों का पता लगाना एक बहुत ही बड़ा काम है, जिसका दायरा भी बहुत अधिक विशाल है।

ट्विलाइट जोन क्या है?
महारासागरों में ट्विलाइट जोन वह क्षेत्र हैं, जो सूर्य की प्रकाश से भी वंचित रह जाते है। इसलिए इसे गोधूली की तरह या अज्ञात परिस्थिति वाला क्षेत्र भी कहते हैं। महासागरों के यह क्षेत्र रहस्यों से भरे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस क्षेत्र में सूर्य की रोशनी की गैर-मौजूदगी में भी असाधारण संख्या में प्रजातियों के पनपने की संभावना होती है।

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रंगीन मछलियां और विशाल प्रवाल भित्तियों का पता चला
जीवन की संभावनाओं की तलाश में हाल के वर्षों में जब वैज्ञानिकों ने ट्विलाइट जोन और मोसोफोटिक जोन (ट्विलाइट जोन से ऊपर वाले क्षेत्र) में सीधा गोता लगाया तो उन्हें रंगीन मछियां और विशाल प्रवाल भित्तियां मिलीं। दरअसल, तकनीक में प्रगति होने से अब वैज्ञानिकों को तेजी से गहरे समुद्री इकोसिस्टम के रहस्य उद्घाटन का अवसर मिला है। महासागर जनगणना वाले प्रोजेक्ट से इसी समुद्री जीवन के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने की उम्मीद है।

जलवायु संकट अनजान समुद्री प्रजातियों का दुश्मन
जलवायु संकट की वजह से जिस तरह से कई प्रजातियों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है तो वैज्ञानिक नई प्रजातियों की पहचान कर उनके संरक्षण के लिए भी कारगर उपाय तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि जलवायु संकट के चलते सदी के अंत तक ट्विलाइट जोन की 20% से 40% तक प्रजातियां कम हो सकती हैं।

ग्रीन हाउस गैस बन रहे हैं विलुप्त होने का कारण
यही नहीं अगर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम नहीं हो पाया तो इस स्थिति से उबरने में हजारों वर्ष तक लग जा सकते हैं। कुछ मामलों में तो इसकी वजह से हमेशा के लिए प्रजातियों के नष्ट हो जाने की आशंका पैदा हो रही है। उदाहरण के लिए यह सारी प्रजातियां आज इस संकट की वजह से विलुप्त होने के खतरे से जूझ रही हैं-
- अटलांटिक पफिन्स
- हरे कछुए
- स्टैघोर्न मूंगा
- मोनार्क तितलियां
- विशालकाय पांडा
- प्रशांत वालरस
- हिम केकड़े
- बंगाल टाइगर
(तस्वीरें- सांकेतिक)












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