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India semiconductor: भारत की GDP से भी आगे निकली ये अमेरिकी कंपनी, सेमीकंडक्टर में इंडिया इतना पीछे क्यों?

India Semiconductor Sector: दुनिया की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में इतिहास रचते हुए अमेरिकी चिप कंपनी एनवीडिया (NVIDIA) का मार्केट कैप पहली बार 5 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹453 लाख करोड़) के पार पहुंच गया है। यह आंकड़ा भारत की कुल GDP (₹364 लाख करोड़) से करीब ₹90 लाख करोड़ अधिक है।

एनवीडिया यह मुकाम हासिल करने वाली दुनिया की पहली कंपनी बन गई है, जिसने सेमीकंडक्टर सेक्टर में एक नई मिसाल कायम की है। IMF के मुताबिक भारत की GDP अभी 4.13 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि एनवीडिया का मार्केट कैप 5.13 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है।

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महज तीन महीने पहले ही एनवीडिया ने 4 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया था। कंपनी के शेयरों में 29 अक्टूबर को 4.5% की तेजी आई, जिससे इसका मूल्य नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया।

AI बूम का सबसे बड़ा फायदा एनवीडिया को

एनवीडिया की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता बाजार। कंपनी की H100 और ब्लैकवेल जैसी चिप्स आज ChatGPT, Google Gemini, Claude जैसे AI टूल्स के संचालन की रीढ़ बन चुकी हैं। दुनिया की लगभग सभी प्रमुख टेक कंपनियां एनवीडिया की ही चिप्स का इस्तेमाल कर रही हैं। एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग (Jensen Huang) ने हाल ही में 500 अरब डॉलर के नए AI चिप ऑर्डर की घोषणा की है और अमेरिका के लिए 7 सुपरकंप्यूटर बनाने की योजना भी पेश की है।

एनवीडिया पर क्यों है भरोसा

  • AI का भविष्य: निवेशकों को भरोसा है कि आने वाले दशक में AI का बाजार कई गुना बढ़ेगा।
  • प्रतिस्पर्धा में आगे: AMD और Intel जैसे दिग्गज भी एनवीडिया की तकनीकी गति को नहीं पकड़ पाए हैं।
  • अमेरिका-चीन विवाद का फायदा: अमेरिका द्वारा चीन को हाई-एंड चिप्स की बिक्री पर रोक से एनवीडिया अमेरिकी सरकार की "पसंदीदा कंपनी" बन गई है।
  • स्मार्ट लीडरशिप: जेन्सेन हुआंग ने सही समय पर कंपनी को गेमिंग से AI की दिशा में मोड़कर इसे टेक दुनिया का सुपरस्टार बना दिया।

भारत के लिए क्या है इसका सबक?

एनवीडिया की सफलता भारत के लिए एक प्रेरणा और चुनौती दोनों है। भारत वर्तमान में सेमीकंडक्टर निर्माण को लेकर आत्मनिर्भर (Make in India for Chips) बनने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार ने ₹76,000 करोड़ की सेमीकंडक्टर मिशन योजना शुरू की है, जिसके तहत गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में चिप मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की तैयारी चल रही है।

भारत में एनवीडिया के पहले से ही चार डेवलपमेंट सेंटर हैं - हैदराबाद, पुणे, गुरुग्राम और बेंगलुरु में। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत यदि AI और चिप डिजाइनिंग में तेजी से निवेश करे, तो अगले कुछ वर्षों में भारतीय कंपनियां भी इस क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा सकती हैं।

सेमीकंडक्टर क्यों है इतना अहम?

सेमीकंडक्टर को तकनीक की दुनिया का "दिमाग" कहा जाता है। कंप्यूटर, मोबाइल, ATM, कार, वॉशिंग मशीन, अस्पतालों की मशीनें - सब में ये चिप्स ही काम करती हैं। स्मार्ट वॉशिंग मशीन में कपड़े सूखते ही मशीन का ऑटो बंद होना, या कार में सीट बेल्ट न लगाने पर अलर्ट बजना ये सब सेमीकंडक्टर चिप की वजह से ही संभव है।

1993 में जेन्सेन हुआंग, कर्टिस प्रीम और क्रिस मालाचोव्स्की ने मिलकर एनवीडिया की स्थापना की थी। आज जेन्सेन हुआंग की नेटवर्थ $174.4 बिलियन (₹15.39 लाख करोड़) है, और वे दुनिया के 8वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। उन्हें सिलिकॉन वैली का "AI रॉकस्टार" कहा जाता है।

एनवीडिया की उपलब्धि यह साबित करती है कि अगर भारत अपने सेमीकंडक्टर मिशन को तेजी से लागू करे, तो आने वाले वर्षों में "इंडिया - द चिप नेशन" का सपना साकार हो सकता है।

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