''जाति सर्वेक्षण के विरोध में नहीं हूं'', खड़गे की आपत्ति के बाद शिवकुमार ने दी सफाई
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा कथित तौर पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री शिवकुमार के जाति जनगणना मुद्दे पर उनके रुख को लेकर आपत्ति जताने के बाद डीके शिवकुमार ने कहा कि वो इसके विरोध में नहीं हैं। उन्होंने मंगलवार, 12 दिसंबर को कहा कि वो जातिय जनगणना के विरोध में नहीं हैं पर चाहते हैं कि इसे वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से किया जाए।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्यसभा में बीजेपी सांसद सुशील कुमार मोदी के इस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने खुद एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें सरकार से जाति जनगणना को रद्द करने का आग्रह किया गया है, खड़गे ने सोमवार को कहा था, "सभी ऊंची जातियां इस पर एकजुट हैं।"

कर्नाटक के दो प्रमुख समुदायों - वोक्कालियाग और लिंगायत ने सर्वेक्षण के बारे में आपत्ति व्यक्त की है, इसे अवैज्ञानिक बताया है और मांग की है कि इसे खारिज कर दिया जाए और नए सिरे से सर्वेक्षण किया जाए।
शिवकुमार, वोक्कालिगा समुदाय से हैं। समुदाय द्वारा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सौंपे गए एक ज्ञापन में कुछ अन्य मंत्रियों के साथ-साथ शिवकुमार के हस्ताक्षर भी थे। इस ज्ञापन में डेटा के साथ रिपोर्ट को अस्वीकार करने का अनुरोध किया गया था।
वीरशैव-लिंगायतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय वीरशैव महासभा ने भी सर्वेक्षण को अवैज्ञानिक बताते हुए अपनी अस्वीकृति व्यक्त की थी। उन्होंने भी नए सिरे से सर्वेक्षण कराने की मांग की। इस संस्था के अध्यक्ष कांग्रेस नेता और विधायक शमनुरु शिवशंकरप्पा हैं।
वहीं इस मामले पर शिवकुमार ने कहा, ''मैंने कहीं भी इसका विरोध नहीं किया है। यह हमारी पार्टी की नीति है और हमारी सरकार ने कर्नाटक में यह (जनगणना) किया...हमारे कई विधायक और मंत्री को इसमें आशंका है। उनका मानना है कि जनगणना बहुत व्यवस्थित तरीके से होनी चाहिए।"
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