सिर्फ LAC पर ही नहीं, चीन ने अंतरिक्ष में भी किया भारत पर हमला, जानिए ISRO ने क्या कहा

नई दिल्ली। चीन दशकों से अपने कमजोर पड़ोसी देशों पर आक्रामक विस्तारवादी नीति अपनाता आया है लेकिन इस बार भारत से पंगा लेना उसे भारी पड़ गया है। जमीन और समुद्र में मुंह की खाने के बाद अब चीन अंतरिक्ष में भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है। कथित तौर पर चीन साल 2012 से लेकर 2018 के बीच कई बार भारतीय सैटेलाइट्स कम्‍युनिकेशंस पर साइबर अटैक कर चुका है। हालांकि, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने यह सुनिश्चित किया है कि उनके सिस्टम सुरक्षित हैं और किसी भी हैकर द्वारा उपकरणों तक पहुंच नहीं बनाई जा सकी है।

अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा

अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अमेरिका स्थित चाइना एयरोस्पेस स्टडीज इंस्टीट्यूट (CASI) की 142 पन्नों की एक रिपोर्ट में 2012 से 2018 के बीच हुए हमलों का विस्तार से जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जेट प्रपल्‍शन लैबारेटरी (JPL) पर चीनी नेटवर्क बेस्‍ड कम्प्‍यूटर हमले के बाद हैकर्स को जेपीएल नेटवर्क्‍स पर पूरा कंट्रोल हासिल हो गया था। हालांकि रिपोर्ट में साइबर हमले के किसी सोर्स का जिक्र नहीं है।

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    भारत के पास है एंटी-सैटेलाइट मिसाइल

    भारत के पास है एंटी-सैटेलाइट मिसाइल

    रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत ने अपनी काउंटर-स्पेस क्षमताओं के हिस्से के रूप में, 27 मार्च, 2019 को एंटी-सैटेलाइट (A-Sat) मिसाइल तकनीक विकसित की थी। जिसने भारत को दुश्मन के उपग्रहों को नष्ट करने के लिए 'काइनेटिक किल' विकल्प से लैस किया। आसान भाषा में कहें तो अब भारत किसी भी दुश्मन देश की सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में ही नष्ट करने की क्षमता रखता है।

    जमीन से अंतरिक्ष तक हमला कर सकता है चीन

    जमीन से अंतरिक्ष तक हमला कर सकता है चीन

    हालांकि, CASI की रिपोर्ट बताती है कि चीन ने अपनी तकनीक पर काफी काम किया है और उसके पास कई सारी काउंटर-स्‍पेस तकनीकें हैं, जो दुश्मन के अंतरिक्ष उपकरणों को जमीन से लेकर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट तक नुकसान पहुंचा सकती हैं। इनमें भी एंटी-सैटेलाइट मिसाइल, को-ऑर्बिटल सैटेलाइट्स, डायरेक्‍टेड एनर्जी वेपंस, जैमर्स और साइबर क्षमताएं शामिल हैं। बता दें कि CASI, एक थिंक-टैंक, अमेरिकी वायु सेना के कर्मचारियों के प्रमुख, अंतरिक्ष अभियानों के अमेरिकी प्रमुख और अन्य वरिष्ठ वायु और अंतरिक्ष नेताओं को सुरक्षा संबंधी सपोर्ट देता है। यह अमेरिकी रक्षा विभाग और अमेरिकी सरकार में विशेषज्ञ अनुसंधान और विश्लेषण सहायक निर्णय और नीति निर्धारक प्रदान करता है।

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