नॉर्थ कोरिया के परमाणु परीक्षण से चिंतित क्यों है भारत
नई दिल्ली। नॉर्थ कोरिया ने हाल ही में हाइड्रोजन बम लॉन्च कर ना सिर्फ अमेरिका को हैरान किया है बल्कि भारत की चिंता को भी बढ़ा दिया है। भारत को इस बात की चिंता है कि नॉर्थ कोरिया को अपने परमाणु परीक्षण के लिए चीन और पाकिस्तान जैसे देशों का भरपूर साथ मिल रहा है। भारत को शक है कि नॉर्थ कोरिया के इस नए हाइड्रोजन बम में भी पाकिस्तान की बहुत बड़ी भूमिका हो सकती है।

चीन और पाक की सह पर कूद रहा है नॉर्थ कोरिया
इसमें कोई दो राय नहीं है कि पिछले एक दशक से चीन और पाकिस्तान सिस्टेमेटिक रूप से नॉर्थ कोरिया का साथ दे रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो दोनों देश नॉर्थ कोरिया को टेक्नोलॉजी उपलब्ध करवा रहे हैं। इसके बदले में नॉर्थ कोरिया ने पाकिस्तान को मिसाइल डिजाइन की टेक्नोलॉजी दी है। ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तान के 1500 किलोमीटर की रेंज वाले 'गौरी-1' मिसाइल को नॉर्थ कोरिया के 'नोडोंग' मिसाइल की ही कॉपी है।

पाक परमाणु हथियारों के लिए नॉर्थ कोरिया का दे रहा है साथ
पाकिस्तान तेजी के साथ अपने परमाणु हथियारों का जखीरा इकट्ठा करने में लगा है। भारत के परमाणु हथियारों की तुलना मे पाकिस्तान बहुत आगे है। पाकिस्तान के पास फिलहाल 130 से 140 परमाणु हथियार है, वहीं भारत के पास इनकी संख्या 110 से 120 है। पाकिस्तान ने पिछले कुछ सालों से अपने परमाणु कार्यक्रम में तेजी लाई है। भारत को लगता है कि चीन भले ही नॉर्थ कोरिया की हरकतों की आलोचना करता रहा है, लेकिन वो इस देश के न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है और ऐसी ही भूमिका पाकिस्तान भी निभा रहा है।

पाक-नॉर्थ कोरिया बढ़ा रहे हैं परमाणु ताकत
पाकिस्तान ने इस साल जनवरी में 2,200 किमी रेंज वाली अबाबील बेलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था। इस मिसाइल के साथ MIRV को भी पेलोड किया गया था, जिसका अर्थ होता है एक ही मिसाइल में अलग-अलग टारगेट को निशाना बनाया जा सकता है।
भारत और जापान के बीच रक्षा मंत्रालय वार्ता की वार्षिक वार्ता के दौरान नॉर्थ कोरिया के छठे न्यूक्लियर टेस्ट की जोरदार आलोचना की थी। नॉर्थ कोरिया के इस नए हाइड्रोजन बम की ताकत 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिरोशिमा और नागासाकी पर किए हमले से भी खतरनाक मानी जा रही है।












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