दिल्ली हिंसा: कोर्ट ने पिता-पुत्र के खिलाफ तय किए आरोप, मस्जिद में आगजनी का है मामला
नई दिल्ली, 24 नवम्बर। दिल्ली की एक अदालत ने उत्तरी पूर्वी दिल्ली में पिछले साल हुई हिंसा के मामले में पिता और पुत्र के खिलाफ आगजनी का मामले में आरोप तय किए हैं। दोनों पर हिंसा के दौरान एक मस्जिद में आग लगाने का आरोप है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंदर भट ने दोनों आरोपियों मिठ्ठन सिंह और जानी कुमार के खिलाफ आगजनी और दंगा करने समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है।

शिकायतकर्ता इसराफिल ने आरोप लगाया था कि मिठ्ठन सिंह और जॉनी कुमार जय श्री राम के नारे लगा रही उस भीड़ का हिस्सा थे जिसने उनके घर को आग के हवाले कर दिया था।
मस्जिद को पहुंचाया नुकसान
शिकायत में इसराफिल ने बताया कि उन्होंने फातिमा मस्जिद की छत पर कूदकर अपनी जान बचाई लेकिन आरोपियों ने मस्जिद को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। शिकायतकर्ता ने आगे कहा कि मिथुन ने अपने बेटे को एक गैस सिलिण्डर दिया और उसे मस्जिद की तरफ फेंकने को कहा।
शिकायत के मुताबिक सिलिण्डर फेंकने के बाद दोनों ने ज्वलनशील पदार्थों से भरी बोतलें मस्जिद की ओर फेंक दीं।
बचाव पक्ष ने गवाहों के बयान में देरी का मुद्दा उठाया
सुनवाई के दौरान अभियुक्तों के वकील ने बचाव में गवाहों के बयान दाखिल करने में देरी की ओर अदालत का ध्यान दिलाया। जिस पर अदालत ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता है कि इन गवाहों के बयान दर्ज करने में जानबूझकर देरी की गई। इन गवाहों की सच्चाई या अन्य का इस मामले की सुनवाई के दौरान ही मूल्यांकन किया जा सकता है।
अदालत ने कहा "इस मामले में आरोपी केवल इसलिए आरोप मुक्त होने का दावा नहीं कर सकता है। ऐसा प्रतीत होता है कि इन गवाहों के बयान दर्ज करने में देरी उस स्थिति के कारण हुई, जो दंगे की घटना के दौरान और उसके बाद में भी इलाके में बनी हुई थी।"












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