बलोच नेता ने उठाया पाक के झूठ से पर्दा, बलूचिस्तान में नहीं है भारतीय सेना
नई दिल्ली। पाकिस्तान अक्सर इंडियन आर्मी और इंटलीजेंस एजेंसी रॉ पर आरोप लगाता रहा है कि बलूचिस्तान में आज जो भी स्थिति है, उसका जिम्मेदार सिर्फ भारत है। लेकिन बलोच नेशनल मूवमेंट के प्रवक्ता हम्माल हैदर पाक के इन आरोपों को उसका सफेद झूठ करार देते हैं।

वनइंडिया के साथ हुई छोटी मगर महत्वपूर्ण बातचीत में हैदर ने बलूचिस्तान में जारी पाक के जुल्मों पर तो बात की ही साथ ही साथ उन्होंने भारत और बलूचिस्तान के रिश्तों के बारे में भी बताया।
वर्ष 2000 से जारी है जुल्म
हम्माल हैदर की मानें तो बलूचिस्तान में रह रहे लोगों पर पाक सेना के जुल्मों की शुरुआत वर्ष 2000 में शुरू हुई थी। दिन पर दिन सेना के जुल्म बढ़ते गए और अब तो इंतहा हो गई है। पाक की सेना यहां पर बेदर्दी से लोगों का कत्ल कर रही है और कई तरह से मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रही है।
पाक की सेना यहां के लोगों का कई तरह से उत्पीड़न कर रही है। हैदर की मानें तो 2000 के बाद से अब बलूचिस्तान में इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं बची है।
बलूचिस्तान में भारत का कोई दखल नहीं
हैदर ने इस इंटरव्यू में इस बात को भी बड़ी बेबाकी से रखा है और बिना डरे हुए कहा है कि कश्मीर में आज जो कुछ भी हो रहा है, उसमें पाक सेना शामिल है। पाक की सेना कश्मीर में ज्यादतियों को अंजाम दे रही है लेकिन बलूचिस्तान के लिए पाक अगर इस तरह की बातें कर रहा है तो वह गलत बोल रहा है।
हैदर की मानें तो बलूचिस्तान के लिए जो कुछ भी आज हो रहा है। यहां पर रहने वाले लोगों के लिए जो भी आंदोलन चलाया जा रहा है, उसमें बलोच नेताओं की बड़ी भूमिका है। इस क्षेत्र में भारत की सरकार, भारतीय सेना और भारत की इंटेलीजेंस एजेंसी रॉ का कोई हाथ नहीं है।
भारत के साथ कोई मुद्दा नहीं
हैदर की मानें तो बलोच नेताओं या फिर बलूचिस्तान में रहने वाले लोग के मन में भारत के लिए किसी भी तरह की कोई दुर्भावना नहीं है। हैदर ने भारत के साथ बलूचिस्तान के रिश्तों को खूबसूरत रिश्तों के तौर पर करार दिया।
उन्होंने कहा कि आज भी बलूचिस्तान में काफी हिंदु रहते हैं जिनके साथ बहुत प्यार भरे रिश्ते हैं। हैदर की मानें तो आजादी के समय दोनों मुल्कों के बीच जो कुछ भी हुआ उसका असर भारत और बलूचिस्तान के रिश्तों पर नहीं पड़ा है।
बलूचिस्तान लौटने में लगता है डर
बलूचिस्तान के गर्वनर और यहां के लोगों पर हो रहे जुल्म के लिए अपनी आवाज उठाने वाले नवाब अकबर खान बुगती की वर्ष 2006 में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद से ही यहां के नेताओं में डर की स्थिति है।
हैदर से जब पूछा गया कि क्या वह और बाकी नेता बलूचिस्तान लौटने का मन बना रहे हैं तो उन्होंने साफ-साफ कहा नहीं। उनका कहना था कि बलूचिस्तान के लिए जो आंदोलन चलाया जा रहा है उसमें काफी दिक्कतें आ रही हैं। लोगों का कत्ल किया जा रहा है।
बलूचिस्तान के बाहर जो लोग हैं वे उन्हें मार डालने के लिए कुछ भी कर सकते हैं, ऐसे में इन हालातों में तो बलूचिस्तान जाना मुमकिन नहीं है।












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