अविश्वास प्रस्ताव: वो 3 दल, जिन्होंने संसद में बदल दिए बहुमत के आंकड़े

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    नई दिल्ली: शुक्रवार को संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होते ही बीजू जनता दल के सांसदों ने वाकआउट कर दिया। हालांकि बीजेडी ने किसी को समर्थन देने का ऐलान नहीं किया था। वहीं, बीजेपी को झटका तब लगा था जब शिवसेना ने सदन में आने से इनकार करते हुए वोटिंग से दूर रहने का फैसला किया। संख्या के हिसाब से इस वक्त तक बीजेडी के 19 और शिवसेना के 18 सांसदों ने सदन से दूरी बना ली थी।

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    बीजू जनता दल का फैसला बीजेपी के लिए फायदेमंद

    बीजू जनता दल का फैसला बीजेपी के लिए फायदेमंद

    दरअसल, पार्टी के सांसद पिनकी मिश्रा भाषण देने के लिए तैयार थे। लेकिन संसद में बहस से कुछ घंटे पहले, बीजू जनता दल प्रमुख नवीन पटनायक ने दिल्ली में अपने सांसदों को बुलाया और उन्हें अविश्वास प्रस्ताव पर बहस से दूर रहने का निर्देश दिया। बीजेडी सूत्रों के अनुसार, नवीन पटनायक ने कहा कि एनडीए और यूपीए दोनों ने ही ओडिशा की मदद नहीं की है। दूसरी ओर, बीजेडी का यह कदम नवीन पटनायक की राजनीतिक शैली का उदाहरण कहा जा सकता है। सदन से वॉकआउट को उस नजरिए से भी देखा जा रहा है जब उपसभापति का चुनाव होगा। इसको लेकर ये अभी नहीं कहा जा सकता है कि विपक्ष के उम्मीदवार पर बीजेडी सहमत होगी। कुल मिलाकर बीजेडी का ये फैसला विपक्ष के लिए झटका जरूर था।

    एआईएडीएमके का मिला साथ

    एआईएडीएमके का मिला साथ

    हालांकि बीजेडी के बाहर जाते ही बीजेपी ने अपनी जीत बड़े अंतर से होनी तय मान ली थी। जबकि दो अन्य दलों एआईएडीएमके और टीआरएस ने अपने फैसले से कुछ हद तक हैरान किया। एआईएडीएमके के 37 सांसदों ने मोदी सरकार के पक्ष में वोटिंग करने का फैसला किया। एआईएडीएमके सांसद पोन्नुसामी वेणुगोपाल ने कहा कि केंद्र ने तमिलनाडु की मदद नहीं की है लेकिन फिर भी कावेरी प्रबंधन बोर्ड (सीएमबी) की स्थापना के लिए केंद्र का आभार प्रकट किया। एआईएडीएमके का कहना था कि आंध्र प्रदेश के हित से जुड़े मुद्दे को लेकर टी़डीपी अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई है। कावेरी मामले पर सहयोग न मिलने से भी एआईएडीएमके विपक्ष से नाराज थी।

    वोटिंग से दूर रही टीआरएस

    वोटिंग से दूर रही टीआरएस

    वहीं, टीआरएस के विनोद कुमार बोयानापल्ली ने तेलुगू देशम पार्टी के अविश्वास प्रस्ताव को झटका दिया। दरअसल, टीडीपी चाहती है कि आंध्र को विशेष दर्जा दिया जाए। टीआरएस किसी भी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने की व्यवस्था का विरोध कर रही है। इसको लेकर ही टीआरएस ने केंद्र सरकार से मतभेदों के बावजूद वोटिंग से दूर रहने का फैसला किया।

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