दहेज कानून को हथियार बना लिया है असंतुष्‍ट पत्‍नियों ने, अब नहीं होगी बेवजह गिरफ्तारी

No arrest on mere allegations in dowry harassment cases: Supreme Court
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज विरोधी कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि असंतुष्ट पत्नियों द्वारा पति और ससुरालवालों के खिलाफ दहेज विरोधी कानून के दुरुपयोग जैसे मामलों में पुलिस स्वत: आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती। उसे कदम की वजह बतानी होंगी, जिनकी न्यायिक समीक्षा की जायेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले गिरफ्तारी और फिर बाकी कार्यवाही करने का रवैया 'निंदनीय' है जिस पर अंकुश लगाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्‍य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि दहेज प्रताड़ना मामले सहित सात साल तक की सजा के दंडनीय अपराधों में पुलिस गिरफ्तारी का सहारा नहीं ले। जज चंद्रमौलि कुमार प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा, 'हम सभी राज्य सरकारों को निर्देश देते हैं कि वह अपने पुलिस अधिकारियों को हिदायत दे कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498-क के तहत मामला दर्ज होने पर वह अपने मन से गिरफ्तारी नहीं करे।

पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 में प्रदत्त मापदंडों के तहत गिरफ्तारी की आवश्यकता के बारे में खुद को संतुष्ट करें। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामले में गिरफ्तारी के वक्त पुलिस के लिए निजी आजादी और सामाजिक व्यवस्था के बीच बैलेंस रखना जरूरी है। अदालत ने कहा कि दहेज प्रताड़ना से जुड़ा मामला गैरजमानती है इसलिए लोग इसे हथियार बना लेते हैं। दहेज प्रताड़ना के ज्यादातर मामले में आरोपी बरी होते हैं और सजा दर सिर्फ 15 फीसदी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को देश के दिग्‍गजों ने सही ठ‍हराया है। सोशल नेटवर्किंग साइट ट्वीटर पर इस फैसले के बाद से प्रतिक्रियाएं शुरु हो गईं हैं।

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