लालू के भावुक खत पर JDU ने भी लिखी तंज भरी चिट्ठी , कहा-आप अपनी करनी से जेल में है, फिर अफसोस किस बात का?

पटना। जमानत याचिका खारिज होने के बाद राजद सुप्रीमो लालू यादव ने बुधवार को जेल से एक भावुक पत्र लिखकर कहा था कि इस बार के चुनाव में सब कुछ दांव पर है, 44 वर्षों में यह पहला चुनाव है जिसमें मैं आपके बीच नहीं हूं। लोकसभा चुनाव 2019 में सक्रिय भूमिका नहीं निभाने पर अफसोस जताते हुए उन्होंने लोगों से लोकतंत्र और संविधान बचाने की अपील की थी, जिसका जवाब आज सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने भी खत के जरिए ही दिया है।

लालू के भावुक खत पर जेडीयू ने दिया तीखा जवाब

लालू के भावुक खत पर जेडीयू ने दिया तीखा जवाब

पार्टी की ओर से खत लालू यादव को संबोधित किया गया है, जिसमें लालू पर कई तंज कसे गए हैं, खत में लिखा है कि जिस लोकतंत्र के चुनाव के लिए आप अफसोस जता रहे हैं वो चुनाव आप की करनी की वजह से ही दूर हुआ है, आप आजादी की लड़ाई या सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने की वजह से जेल में नहीं है बल्कि आप ने घोटाला किया है, जिसके दोषी आप पाए गए हैं और आपको सजा मिली है, इसलिए आप लोकतंत्र के इस पावन पर्व में शामिल होने के योग्य ही नही हैं ऐसे में अफसोस जताने का कोई अर्थ नहीं है।

'पैसा, घर और बच्चे सभी को तो आपने सेट कर दिया'

'पैसा, घर और बच्चे सभी को तो आपने सेट कर दिया'

खत में लिखा है कि आप किस चीज का अफसोस जाहिर कर रहे हैं, आप के समय बिहार में जंगल राज था और आज बिहार विकास के पथ पर चल रहा है और यहां के सुशासन की बात होती है, आपने तो अपनी तरह अपने बच्चों को भी बना दिया है, आपने अपने शासनकाल में ना जाने कितनी बेनामी संपत्ति बनाई , पुत्रों, रिश्तेदारों को सबको राजनीति में सेट कर दिया और अब आपको क्या चाहिए?

'आपने तो अपने बच्चों को भी अपने जैसा बना दिया'

'आपने तो अपने बच्चों को भी अपने जैसा बना दिया'

आपने तो अपने बच्चों को भी वो सब कुछ सिखा दिया जो कि आप करते थे, अदालत ने आपको सरकारी राशि में घोटाला करने का दोषी पाया है, ऐसे में आपको सजा तो होनी ही थी इसलिए आपके मुख से इस तरह की बातें शोभा नहीं देती हैं।

बिहारवासियों के साथ मैं फिर से धोखा नहीं होने दूंगा: लालू

बिहारवासियों के साथ मैं फिर से धोखा नहीं होने दूंगा: लालू

आपको बता दें कि लालू यादव ने अपने खत को ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने अफसोस जाहिर करते हुए यह लिखा था कि इस वक्त जब बिहार एक नई गाथा लिखने जा रहा है और लोकतंत्र का उत्सव चल रहा है, मैं यहां रांची के अस्पताल में अकेले बैठकर सोच रहा हूं कि क्या विध्वंसकारी शक्तियां मुझे इस तरह कैद करा के बिहार में फिर किसी षड्यंत्र की पटकथा लिखने में सफल हो जाएंगी, मैं अपने विचारों को आपसे साझा कर रहा हूं, क्योंकि एक दूसरे से विचारों को साझा करके ही हम इन बांटने वाली ताकतों से लड़ सकते हैं, आप सोचिए, समझिए और फिर राष्ट्रहित में फैसला कीजिए।

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