क्या सच में नीडो के लिए ही जंतर-मंतर पहुंचे राहुल गांधी?
राहुल ना केवल प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बैठें बल्कि उन्हें पूरा भरोसा भी दिलाया कि वह नीडो के हत्यारों को जरूर सजा दिलायेंगे और नार्थ ईस्ट के लोग भी भारत का ही अंग है।
लेकिन राजनैतिक समक्ष रखने वालों की नजर में राहुल का जंतर-मंतर जाना भी एक राजनीति का हिस्सा लगता है। लोगों ने राहुल से सवाल किये हैं कि आज राहुल को सड़क के प्रदर्शनकारियों की चीख-पुकार सुनायी पड़ रही हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव को ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। लेकिन आज से करीब डेढ़ साल पहले जब निर्भया कांड के लिए लोग सड़कों पर चिल्ला रहे थे तब राहुल गांधी कहां थे?
यही नहीं जब जनलोकपाल बिल के लिए रामलीला मैदान में अन्ना हजारे अनशन कर रहे थे तब भी राहुल गांधी नजर नहीं आये ,यही नहीं जब आधी रात को रामलीला मैदान में सोते हुए आदमी-औरतों और बच्चों पर लाठियां भांजी गयीं और बाबा रामदेव को महिला के वस्त्र में भागना पड़ा तब भी राहुल गांधी चुप ही रहे थे।
लेकिन आज जब चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस बुरी तरह से हार गयी है और तमाम सर्वों की रिपोर्ट बताती है कि लोकसभा चुनाव के नतीजे भी उसके खिलाफ ही है, ऐसे में अपनी शाख बचाने के लिए राहुल गांधी, आम लोगों के दर्द समझने की कोशिश कर रहे हैं।
वैसे सवाल यहां यह भी किया गया है कि मरने वाला मासूम नीडो अरूणाचल के ही कांग्रेस विधायक का बेटा था इसलिए राहुल गांधी जंतर-मंतर पहुंचे थे। अगर वो कांग्रेसी का बेटा नहीं होता तो राहुल यूं जंतर-मंतर नहीं जाते।
लेकिन जहां आलोचना करने वाले राहुल गांधी के इस कदम को राजनीति से जोड़ कर देख रहे हैं वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का यह भी कहना है कि हो सकता है कि राहुल गांधी को अब अपनी गलतियां समझ में आने लग गयी हैं इसी वजह से वह अब लोगों से मिल रहे हैं, मीडिया में साक्षात्कार दे रहे हैं। इसे राहुल के सराहनीय कदम से जो़ड़कर देखना चाहिए ना कि राजनीति का हिस्सा मानकर इसकी आलोचना करनी चाहिए।
आपको बता दें कि सोमवार शाम को राहुल गांधी जंतर-मंतर पहुंचे थे और छात्रों के साथ वक्त बिताकर उनके दुख को समझने की कोशिश की और वादा किया कि नीडो को इंसाफ जरूर मिलेगा।
राहुल ने कहा कि मौत के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूर और बहुत जल्द होगी। राहुल ने छात्रों के एक समूह से कहा कि वह केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को इस संबंध में चिट्ठी लिखेंगे। राहुल ने गमगीन छात्रों के साथ बैठकर उनलोगों का दर्द बांटने की भी कोशिश की।
गौरतलब है कि अरुणाचल प्रदेश के एक कांग्रेसी विधायक नीदो पवित्रा के बेटे निडो तानिया की दक्षिणी दिल्ली के लाजपत नगर में कथित तौर पर दो दुकानदारों द्वारा बुरी तरह पिटाई किए जाने से 30 जनवरी को मौत हो गई थी।
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