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डिब्रू-साइखोवा राष्ट्रीय उद्यान में जंगली घोड़ों के संकट पर NGT सख्त, केंद्र समेत कई निकायों को नोटिस जारी

Assam News: राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने असम के डिब्रू-साइखोवा राष्ट्रीय उद्यान में संकटग्रस्त जंगली घोड़ों की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल देते हुए केंद्र और अन्य प्रासंगिक निकायों को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई 16 दिसंबर को एक स्वतः संज्ञान मामले के तहत हुई। जिसमें एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेन्थिल वेल ने इन दुर्लभ घोड़ों के विलुप्त होने की आशंका को लेकर चिंता व्यक्त की।

जंगली घोड़ों के अस्तित्व पर मंडराता संकट

डिब्रू-साइखोवा राष्ट्रीय उद्यान में स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाले ये जंगली घोड़े, पालतू घोड़ों के अनियंत्रित वंशज माने जाते हैं। एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने तस्करी, आवास क्षति, चरागाह क्षेत्रों के सिकुड़ने, बाढ़ और संरक्षण में प्रशासनिक उपेक्षा को उनकी घटती संख्या का प्रमुख कारण बताया है।

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अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि ये घोड़े वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के दायरे में नहीं आते। जिससे उनकी संरक्षण स्थिति का निर्धारण और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। साथ ही इनकी जनगणना का अभाव समस्या को और गंभीर बनाता है।

संरक्षण कानूनों के उल्लंघन पर चिंता

एनजीटी ने इस मामले में जैव विविधता अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के संभावित उल्लंघनों को रेखांकित किया है। रिपोर्ट में इन पर्यावरणीय मानदंडों के अनुपालन पर भी सवाल उठाए गए हैं।

इन निकायों को बनाया प्रतिवादी

अधिकरण ने इन निकायों को प्रतिवादी बनाकर जवाब मांगा है। जिसमें केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक और असम के मुख्य वन्यजीव वार्डन शामिल हैं। एनजीटी ने इन निकायों को 27 फरवरी तक कोलकाता स्थित अपनी पूर्वी क्षेत्रीय पीठ में हलफनामे के जरिए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

ऐतिहासिक महत्व और अनोखी प्रजाति

रिपोर्ट के अनुसार ये घोड़े लगभग 80 वर्षों से जंगल में जीवित हैं। ऐसा माना जाता है कि ये द्वितीय विश्व युद्ध के युद्ध घोड़ों या चीन के प्रेजेवलस्की के घोड़े की प्रजातियों के वंशज हैं। उनकी दुर्लभता और ऐतिहासिक महत्व के कारण इनकी रक्षा अत्यावश्यक है।

एनजीटी का कड़ा रुख

एनजीटी ने इन घोड़ों के संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य सरकार को अपनी जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की चेतावनी दी है। जंगली घोड़ों के आवास, चरागाहों और संरक्षण मानदंडों के पालन की स्थिति पर उठाए गए सवालों का जवाब मांगा गया है।

मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को

इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी। यह देखना अहम होगा कि एनजीटी की सख्ती के बाद संबंधित निकाय जंगली घोड़ों के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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