अस्पताल ने नहीं लिए 500 और 1000 रुपए के नोट, नवजात की मौत
जिस अस्पताल में महिला का 6 महीने से चेकअप हो रहा था उसी ने उन्हें 500 और 1000 रुपए के नोट होने के चलते वापस कर दिया गया।
मुंबई। महाराष्ट्र के मुंबई में गोवंडी क्षेत्र में रहने वाले जगदीश और किरन शर्मा के लिए सरकार द्वारा 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा आफत बन गई। इस घोषणा के चलते इस दंपति ने अपना नवजात बच्चा खो दिया।

दरअसल, गोवंडी के एक प्राइवेट अस्पताल में वे लोग अपने नवजात बच्चे को इलाज के लिए ले गए थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उसका इलाज सिर्फ इसलिए नहीं किया, क्योंकि उनके पास जमा करने के लिए 500 और 1000 रुपए के नोट थे, जिस पर मोदी सरकार ने बैन लगा दिया है।
महिला का नाम किरन है, जिनका बुधवार को घर में ही प्रसव हो गया था। इस दौरान उनके पति गाड़ी की व्यवस्था कर रहे थे, ताकि किरन को अस्पताल पहुंचाया जा सके।
जब वे किरन को लेकर जीवन ज्योति अस्पताल पहुंचे तो वहां से उन्हें 500 और 1000 रुपए के नोट होने के चलते वापस कर दिया गया। आपको बता दें कि इसी अस्पताल में किरन को पिछले 6 महीने से चेक-अप आदि के लिए लाया जा रहा था, लेकिन इसके बावजूद भी अस्पताल ने कोई दया नहीं दिखाई।
किरन के पति जगदीश अस्पताल द्वारा मांगे जा रहे पैसों में करीब 6000 रुपए का भुगतान 500 और 1000 रुपए के नोट से कर रहे थे, क्योंकि उनके पास बस वही पैसे बचे थे, लेकिन अस्पताल ने उसे लेने से मना कर दिया।
जगदीश शर्मा ने कहा- मैंने अस्पताल प्रशासन से बार-बार प्रार्थना की और यह भी कहा कि सरकार ने अस्पताल में 500 और 1000 रुपए के नोट चलने की बात कही है, लेकिन उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी।
उन्होंने बताया कि बच्चे की फाइल भी न मिल पाने की वजह से वह अपने बच्चे को किसी अन्य अस्पताल में भर्ती नहीं कर सके और गुरुवार को तेज बुखार की वजह से उनके बच्चे की मौत हो गई।
अब उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील करते हुए पुलिस को एक पत्र भी लिखा है। पुलिस ने बताया कि वह शुरुआती जानकारी के आधार पर अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रहे हैं। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने जगदीश शर्मा के सभी आरोपों को गलत करार दिया है।












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