New Labour Code पर संसद में बहस! अब समान काम के लिए मिलेगा एक समान वेतन, जानें आपके लिए क्या बदलेगा?

New Labour Code Debate Parliament: मोदी सरकार 3.0 के बजट सत्र के 12वें दिन लोकसभा में श्रम और रोजगार मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने देश के कार्यबल (Workforce) के लिए बड़े बदलावों का खाका पेश किया।

इस दौरान श्रमिक अधिकारों और रोजगार सुधारों को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल रोजगार पैदा करना नहीं, बल्कि कामकाजी परिस्थितियों में पारदर्शिता और लैंगिक समानता (Gender Equality) सुनिश्चित करना भी है।

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सरकार द्वारा लाए जा रहे नए लेबर कोड (Labour Code) के तहत अब देश के करोड़ों कामगारों को कानूनी सुरक्षा और समानता का अधिकार देने की तैयारी है। जानिए संसद में क्या हुआ...

Appointment Letter Mandatory: नियुक्ति पत्र अब कानूनी अधिकार

श्रम मंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए एक ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब जिस भी व्यक्ति को नौकरी मिलेगी, उसे अनिवार्य रूप से नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) दिया जाएगा। मांडविया ने कहा, "नियुक्ति पत्र केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं होगा, बल्कि नौकरी की शर्तों, वेतन और अन्य लाभों का एक लिखित कानूनी प्रमाण होगा।"

शोषण पर लगाम लगाने के लिए पहले असंगठित और अर्ध-संगठित क्षेत्रों में मौखिक रूप से काम पर रख लिया जाता था, जिससे विवाद की स्थिति में कामगारों के पास कोई सबूत नहीं होता था। अब यह कानूनी रूप से अनिवार्य होने से कर्मचारियों का शोषण रुकेगा।

Equal Pay Equal Work: 'समान काम' के लिए मिलेगा 'समान वेतन'

महिला और पुरुष कामगारों के बीच वेतन विसंगति को दूर करने के लिए लेबर कोड में क्रांतिकारी प्रावधान किए गए हैं। मंत्री ने बताया कि पहले समान काम के लिए महिलाओं और पुरुषों के वेतन में अंतर को रोकने के लिए सख्त कानूनी पाबंदी की कमी थी। नए लेबर कोड के लागू होने के साथ ही 'समान काम के लिए समान वेतन' की कानूनी गारंटी दी गई है। यानी अब कोई भी नियोक्ता (Employer) केवल लिंग के आधार पर वेतन में कटौती या अंतर नहीं कर पाएगा।

Workers Rights India: लेबर कोड से बदल जाएगी कामगारों की दुनिया

मनसुख मांडविया ने जोर देकर कहा कि सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड्स का उद्देश्य पुराने पड़ चुके श्रम कानूनों को आधुनिक बनाना है। डिजिटल सुरक्षा के लिए 'ई-श्रम' पोर्टल के माध्यम से असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। गिग वर्कर्स (जैसे डिलीवरी पार्टनर और फ्रीलांसर) को भी पहली बार सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की योजना है।

बजट 2026 और रोजगार के नए अवसर

मंत्री ने बजट में घोषित रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (Employment Linked Incentive - ELI) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं के ईपीएफओ (EPFO) योगदान में मदद कर रही है, जिससे कंपनियों के लिए नए लोगों को नियुक्त करना आसान और सस्ता हो गया है। हालांकि, विपक्ष ने इन दावों पर सवाल भी उठाए।

विपक्षी सांसदों का तर्क है कि लेबर कोड लागू होने से कंपनियों को कर्मचारियों को निकालने की अधिक छूट मिल सकती है। इस पर मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार का प्राथमिक हित श्रमिक का कल्याण है और उनके अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। श्रम मंत्री का यह बयान दर्शाता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों (ILO Standards) की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है, जहाँ पारदर्शिता और समानता कार्य संस्कृति का हिस्सा होंगे।

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