NEET, JEE Main 2020: 150 से अधिक शिक्षाविदों ने PM मोदी को लिखा पत्र, कहा-ये बच्चों के भविष्य का सवाल
नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी के बीच सरकार सिंतबर में JEE और NEET परीक्षा करवाने जा रही है, इस परीक्षा को टालने को लेकर सोशल मीडिया पर एक अभियान चलाया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस समेत कई बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने सरकार के इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया हैं, यही नहीं भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी खुद सरकार के इस फैसले को गलत बता रहे हैं, उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा है कि इस समय में जेईई-नीट परीक्षा को कराया जाना बिल्कुल इंदिरा सरकार में हुई नसबंदी जैसी गलती होगी।
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लेकिन इसी बीच भारत और विदेशों के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 150 से अधिक शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई (मुख्य) और नीट में यदि और देरी हुई तो छात्रों का भविष्य इससे प्रभावित होगा, जो कि सही नहीं है। इन शिक्षाविदों ने अपने पत्र में कहा कि कुछ लोग अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए छात्रों के भविष्य के साथ खेलने की कोशिश कर रहे हैं, ये लोग सिर्फ अपने मतलब के लिए छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
150 से अधिक शिक्षाविदों ने लिखा PM को पत्र
युवा और छात्र राष्ट्र का भविष्य हैं, इसलिए एग्जाम को लेकर जो ही शक और आशंकाएं हैं जिन्हें जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता है। हमें पूरा भरोसा है कि केंद्र सरकार पूरी सावधानी बरतते हुए जेईई और नीट परीक्षाएं आयोजित करेगी। मालूम हो कि हस्ताक्षरकर्ताओं में दिल्ली विश्वविद्यालय, इग्नू, लखनऊ विश्वविद्यालय, जेएनयू, बीएचयू, आईआईटी दिल्ली और लंदन विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ यरुशलम और इजराइल के बेन गुरियन विश्वविद्यालय के भारतीय शिक्षाविद शामिल हैं।
4000 से अधिक छात्रों ने की भूख हड़ताल
गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) और जेईई (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) परीक्षा 2020 को कराए जाने का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। राजनेताओं के साथ-साथ छात्रगण भी कोरोना वायरस के बीच परीक्षाओं के आयोजन को गलत मान रहे हैं। देशभर के 4000 से अधिक छात्रों ने इन परीक्षाओं को स्थगित करवाने की मांग को लेकर एक दिन की भूख हड़ताल भी की थी, जबकि शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने परीक्षा कराए जाने के केंद्र के फैसले का समर्थन किया है। उनका कहना है कि छात्र और उनके माता-पिता खुद ये चाहतें हैं कि परीक्षा हो, उन्होंने कहा कि जेईई में बैठने वाले 80 फीसदी छात्रों ने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लिए गए हैं।












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