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Railway Law में संशोधन के लिए सरकार को मिला NDA सहयोगियों का साथ, इन मुद्दों पर मिली नसीहत

Parliament Winter Session: रेलवे अधिनियम,1989 को सरल बनाने के उद्देश्य से लाए गए विधेयक को लोकसभा में एनडीए के सहयोगियों से भरपूर समर्थन मिला है। तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी),जनता दल (यूनाइटेड) और एलजेपी (रामविलास) ने इसका समर्थन किया। हालांकि,उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा और वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रियायतों जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई।

टीडीपी के जीएम हरीश बालयोगी ने पुराने औपनिवेशिक कानूनों को आधुनिक कानून से बदलने की इस विधेयक की प्रशंसा की। उन्होंने कहा,'यह विधेयक पुराने औपनिवेशिक कानूनों को खत्म करने और उनकी जगह स्वदेशी,भविष्य के कानून लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और रेलवे बोर्ड को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक बदलाव पेश करता है।'

indian railway

सुरक्षा और रियायतों पर ध्यान केंद्रित करें
जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कवच प्रणाली जैसे सुरक्षा उपायों की सराहना की,लेकिन सरकार से मौजूदा मुद्दों पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा,'महामारी के दौरान,कई ट्रेनें बंद कर दी गईं और किराए में वृद्धि हुई। इन सेवाओं को फिर से शुरू किया जाना चाहिए और वरिष्ठ नागरिक रियायतें,जो रोक दी गई थीं, उन्हें फिर से शुरू किया जाना चाहिए।'

शिवसेना के श्रीरंग बारने ने वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाले लाभों के बारे में यही भावना दोहराई। उन्होंने संसद को याद दिलाया कि महामारी से पहले ऐसी रियायतें आम थीं। इस बीच,लोजपा (रामविलास) के सांसद राजेश वर्मा ने सभी रेलवे डिवीजनों में मशीनीकृत लॉन्ड्रियों का विस्तार करने का आह्वान किया।

शिवसेना (यूबीटी) के अरविंद गणपत सावंत ने रेलवे की ज़मीन पर झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों की समस्याओं को उजागर किया। सावंत ने कहा,'न तो रेलवे और न ही राज्य सरकार उनके पुनर्वास की ज़िम्मेदारी लेती है। मनमाने ढंग से नोटिस जारी किए जाते हैं और लोगों को बिना किसी योजना के विस्थापित किया जाता है।'

उन्होंने जमीनी स्तर पर बदलाव लागू किए बिना नए स्टेशनों के नाम घोषित करने के लिए सरकार की आलोचना की। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के सांसद अब्दुस्समद समदानी ने केरल की बड़ी आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए और अधिक स्टेशनों की मांग की।

आधुनिकीकरण का आह्वान
भाजपा के धर्मबीर सिंह ने कहा कि 2014 से नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे में काफी बदलाव आया है। उन्होंने दावा किया कि एक दशक बाद यहां आने वाला कोई भी व्यक्ति गति और पैमाने में हुए विकास को देखकर आश्चर्यचकित हो जाएगा।

कांग्रेस की संजना जाटव ने आधुनिकीकरण के सरकारी दावों के बावजूद हाल ही में हुए रेल हादसों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा,'सरकार के बड़े-बड़े दावों के बावजूद आधुनिकीकरण में बहुत कुछ कमी रह गई है। बुनियादी सुविधाओं की कमी प्रगति में बाधा बन रही है। सरकार को लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों से निपटने के लिए अपने प्रचार को एक तरफ रखना चाहिए।'

रेलवे विकास पर अलग-अलग राय
भाकपा (माले) लिबरेशन के सांसद सुदामा प्रसाद ने मोदी सरकार के तहत रेलवे में एक विशेष व्यापारिक समूह को लाभ पहुंचाने की आलोचना की,जिसे उन्होंने "अमृत काल" करार दिया।

विधेयक में भारतीय रेलवे बोर्ड अधिनियम, 1905 के प्रस्तावों को रेलवे अधिनियम, 1989 में शामिल करने का प्रस्ताव है, ताकि दो अलग-अलग कानूनों पर निर्भरता कम करके कानूनी ढांचे को सरल बनाया जा सके।

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