नवजोत सिंह सिद्धू कैप्टन अमरिंदर सिंह का सियासी खेल बनाएंगे या बिगाड़ देंगे?

कांग्रेस हाईकमान ने क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब में पार्टी प्रमुख बना दिया है.

पंजाब में कांग्रेस ने यह फ़ैसला मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सिद्धू के प्रति नापसंदगी के बावजूद लिया. अभी हाल ही में अमरिंदर सिंह ने कहा था कि वो सिद्धू से तब तक नहीं मिलेंगे जब तक वो अपने 'अपमानजक ट्वीट्स' के लिए उनसे माफ़ी नहीं माँग लेते.

कुछ समय पहले दोनों नेताओं के बीच इतने तगड़े मतभेद के बीच कांग्रेस हाईकमान ने राज्य में विधानसभा चुनाव से लगभग आठ महीने पहले मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को 18 बिंदुओं वाली 'टु डू लिस्ट' थमा दी थी.

इसे अमरिंदर सिंह और पार्टी चलाने के उनके तरीके पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाने के तौर पर देखा गया.

कैप्टन अमरिंदर सिंह के वफ़ादार नेता पर्दे के पीछे यह स्वीकार करते हैं कि कांग्रेस के इस कदम से वो अपमानित महसूस करते हैं. यही वजह है कि विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय नेतृत्व की ओर से दोनों विरोधी ख़ेमों में मेलजोल कराने और पार्टी की छवि बदलने की हुई कोशिश आख़िर में बेअसर साबित हो सकती है.

राहुल गांधी के साथ नवजोत सिंह सिद्धू
NAVJOT SINGH SIDHU/FACEBOOK
राहुल गांधी के साथ नवजोत सिंह सिद्धू

कैप्टन अमरिंदर की सहमति के बिना कांग्रेस में ला गए थे सिद्धू

नवजोत सिंह सिद्धू ने साल 2004 में भारतीय जनता पार्टी के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी, जब वो अमृतसर से सांसद चुने गए थे.

साल 2014 में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को अमृतसर से चुनाव लड़ाया गया और सिद्धू को राज्यसभा भेज दिया गया. साल 2016 में वो बीजेपी से अलग हो गए.

इसके कुछ ही महीनों के भीतर वो कांग्रेस में शामिल हो गए. साल 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें कांग्रेस में लाने में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की अहम भूमिका थी.

उस समय भी कैप्टन अमरिंदर सिंह इस फ़ैसले से सहमत नहीं थे. फिर अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने पंजाब में 117 में से 77 सीटें हासिल कर शानदार जीत दर्ज की.

जनरल कमर बाजवा से गले मिलते सिद्धू
ANI
जनरल कमर बाजवा से गले मिलते सिद्धू

सिद्धू का पाकिस्तान जाना, बाजवा को गले लगाना और विवाद

कांग्रेस की जीत के बाद सिद्धू को कैप्टन अमरिंदर की कैबिनेट में मंत्री के तौर पर जगह तो मिली, लेकिन साल 2018 में सिद्धू जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का न्योता कबूल कर उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने पाकिस्तान पहुँचे, तब से अमरिंदर सिंह और उनके बीच तनाव पैदा हो गया.

इस दौरान जब सिद्धू के पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा को गले लगाने की चौतरफ़ा आलोचना हुई तो कैप्टन अमरिंदर सिंह भी आलोचकों में शामिल हो गए.

दोनों नेताओं के बीच तनाव जब ज़्यादा बढ़ने लगा तो सिद्धू ने मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया.

मगर इन सबके बीच सिद्धू को पंजाबी सिखों के लगभग सभी वर्गों में भारत-पाकिस्तान में अमन का पैग़ाम लाने वाले शख़्स के तौर पर देखा गया, जो करतारपुर कॉरिडोर खोलने के पाकिस्तानी प्रस्ताव की ख़ुशख़बरी लाए.

करतारपुर कॉरिडोर खुलने से भारतीय सिखों के लिए गुरु नानक से जुड़े करतारपुर गुरुद्वारे तक जाना मुमकिन हो सका.

यह भी पढ़ें: जनरल बाजवा से किस वजह से गले मिले सिद्धू

कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू
Twitter
कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू

पहले चुप्पी फिर जमकर हमले

कैबिनेट से इस्तीफ़ा देने के बाद कई महीनों तक तो सिद्धू ख़ामोश से रहे, लेकिन फिर वो कई मुद्दों को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार पर ज़ोर-शोर से हमले बोलने लगे.

अपनी कविताओं और उपमाओं के ज़रिए वो कैप्टन अमरिंदर सिंह पर पंजाब के लोगों से किए गए वादों से मुकरने का आरोप लगाने लगे.

नतीजन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्य के प्रभारी हरीश रावत ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों 18 बिंदुओं वाली 'टु डू' लिस्ट थमा दी.

अपने वीडियो में सिद्धू पंजाब सरकार से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के वादे को पूरा करने को कहते नज़र आते हैं.

इसके अलावा वो साल 2015 के बरगाड़ी फ़ायरिंग मामले में इंसाफ़ न मिलने को लेकर भी अपनी आवाज़ उठाते रहे हैं. उस समय प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल पंजाब का नेतृत्व कर रहे थे.

साथ ही सिद्धू, कैप्टन अमरिंदर सिंह की अनुपलब्धता, खनन माफ़िया और परिवहन माफ़िया का मुद्दा भी समय-समय पर उठाते रहे हैं.

वहीं, कैप्टन अमरिंदर सिंह के वफ़ादार साथी, सरकार का बचाव करते रहे हैं. वो बरगाड़ी फ़ायरिंग मामले में हो रही विशेष जाँच, ड्रग डीलरों और तस्करों के ख़िलाफ़ राज्य सरकार के मामले दर्ज किए जाने और नौकरी के वादे को पूरा करने के लिए रोज़गार मेलों का हवाला देते हैं.

लेकिन उनके इन दावों का रंग फीका पड़ गया जब ख़ुद कांग्रेस नेतृत्व ने अमरिंदर सरकार से वादे पूरे करने को कहते हुए 18 बिंदुओं वाला नोट पकड़ा दिया.

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नवजोत सिंह सिद्धू
NAVJOT SINGH SIDHU/FACEBOOK
नवजोत सिंह सिद्धू

सुलह होगी या बिगड़ेंगे हालात?

कांग्रेस विधायकों से सिद्धू को भरपूर समर्थन कभी नहीं मिला है, बल्कि उन्हें अमूमन 'अकेले खिलाड़ी' के रूप में जाना जाता रहा है.

हालाँकि कई विधायकों ने जब देखा कि सिद्धू के प्रति केंद्रीय नेतृत्व के रुख में सकारात्मक परिवर्तन आया है तो उनके सुर बदल गए.

हाल ही में हुई कैबिनेट मीटिंग में जब दो विधायकों के बेटों को नौकरी दिए जाने का मुद्दा उठाया गया तो कभी कैप्टन अमरिंदर के वफ़ादार माने जाने वाले मंत्रियों- तृप्त रजिंदर बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा और सुख सकारिया ने भी इसका पुरज़ोर विरोध किया.

वहीं, चरणजीत सिंह चन्नी, रवनीत सिंह बिट्टू और पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख प्रताप सिंह बाजवा अमरिंदर सरकार के पुराने आलोचक रहे हैं.

सिद्धू पिछले कुछ दिनों से कई विधायकों से मिल रहे हैं. कई मंत्री और विधायक भी पिछले कुछ दिनों से सिद्धू के लिए बैठकें आयोजित कर रहे हैं.

यानी साफ़ है कि ये सब विधानसभा चुनाव से पहले विरोधी खेमों में सुलह कराने की बजाय कांग्रेस के लिए पंजाब में हालात और मुश्किल ही सकता है.

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