क्या है बरगद के इन 1100 पेड़ों की खासियत, जिनकी रक्षा के लिए लोगों ने छेड़ी प्रशासन के खिलाफ 'जंग'
हैदराबाद, 09 नवंबर। हमारी धरती पर लगातार जनसंख्या का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। इंसानों के रहने के लिए अब तेजी से जंगलों को काटा जा रहा है। हम सभी जानते हैं कि मानव जाति के विकास के लिए तीव्र शहरीकरण का प्रकृति पर खतरनाक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। हैदराबाद के चेवेल्ला अब शहरीकरण के नाम पर 1100 से अधिक बरगद के पेड़ों की बली चढ़ाने की योजना है। हालांकि पेड़ों की रक्षा के लिए अब स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने जिम्मा उठाया है।

इस वजह से काटे जा सकते हैं पेड़
दरअसल, चेवेल्ला से होकर एक हाईवे निकलने वाला है जिसके लिए रास्ते में आने वाले 1100 से अधिक बरगद के पेड़ों को गिराए जाने की योजना है। ये पेड़ स्थानीय लोगों के लिए काफी अहम हैं, क्योंकि ये पर्यावरण और शहर के हरे भरे आवरण में योगदान करते हैं। लोगों का कहना है कि राजमार्ग विस्तार परियोजना न केवल पारिस्थितिकी को परेशान करेगा बल्कि इतिहास के एक महत्वपूर्ण हिस्से को मिटा देगा।

लोगों ने लिया पेड़ की रक्षा का संकल्प
राहत की बात है कि प्रशासन को ऐसा करने से रोकने के लिए शहर के इको-योद्धाओं का एक समूह आगे आया है। हैदराबाद से लगभग 45 किमी दूर तेलंगाना में बरगद के पेड़ों को बचाने के लिए 'नेचर लवर्स ऑफ हैदराबाद' के 200 से अधिक सदस्य एक स्थान पर इकट्ठा हुए और पेड़ों को बचाने के लिए प्रशासन के खिलाफ जंग छेड़ दी। उन्होंने पेड़ों के सामने दीये जलाए और उनकी रक्षा करने का संकल्प लिया।

44000 से अधिक लोगों का मिला साथ
इतना ही नहीं लोगों ने पेड़ों के चारों ओर दोस्ती और प्यार के कई धागे बांधे। कुछ ने चेवेल्ला बरगद के समर्थन में पेंटिंग और पोस्टर भी दिखाए। इसके अलावा ग्रुप ने अपनी आवाज लोगों तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन अभियान भी शुरू किया। अब तक 44,000 से अधिक लोगों ने इस पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। चेवेल्ला के पास स्थित बरगद और अन्य 9000 पेड़ हैदराबाद-मनेगुडा राजमार्ग के दोनों किनारों से छत का काम करते हैं।

100 साल पुराना है पेड़ों का इतिहास
लोगों का दावा है कि पेड़ों को लगभग 100 साल पहले निजामों द्वारा लगाया गया था, जो उनके लिए किसी विरासत से कम नहीं है। 'नेचर लवर्स ऑफ हैदराबाद' ग्रुप के एक सदस्य ने इस बात पर भी जोर देते हैं कि पेड़ वातावरण से कार्बन को अलग करते हैं और पहाड़ियों से बारिश का पानी हैदराबाद में बाढ़ बनकर ना आए, इससे भी वह हमारी सुरक्षा करते हैं। ये पेड़ नहीं चौकीदार हैं। इन पेड़ों से पक्षियों का जीनवचक्र भी जुड़ा हुआ है।

बेघर हो जाएंगे पक्षी
पेशे से राइटर पर पक्षियों के विशेषज्ञ आशीष पिट्टी ने कहा, 'वो पक्षी जो बरगद में और उसके आस-पास रहते हैं और जिनका जीवनचक्र आंतरिक रूप से उनसे जुड़ा हुआ है, अगर पेड़ काटे जाते हैं तो वे अपना निवास स्थान खो देंगे।' इको-योद्धाओं में से एक साधना रामचंदर ने कहा, 'भले ही सरकार नए पौधे लगाने या पेड़ों को स्थानांतरित करने की पेशकश करती है, लेकिन ऐसा नहीं है। अब सभी पर्यावरण की स्थिति बदल गई है और हमें नहीं पता कि नए पौधे इन पेड़ों की जगह ले सकते हैं या नहीं।'

परियोजना को स्थगित करने की अपील
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जब आप किसी पेड़ को स्थानांतरित करते हैं, तो उसकी शाखाएं और जड़ें काट दी जाती हैं और वे पहले जैसे नहीं रहते। हम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से इस परियोजना को स्थगित करने की अपील करते हैं। बता दें कि सिर्फ चेवेल्ला ऐसा क्षेत्र नहीं है जो वनों की कटाई के अधीन है, बल्कि मुदिम्याल और कांडलापल्ली के अंतिम बचे हुए झाड़ीदार जंगल हैं। यहां भी परियोजना के नाम पर जंगलों की कटाई की योजना है।
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