अटल के जन्मदिन पर लखनऊ में हुंकार भरेंगे मोदी
लखनऊ | अभी हाल ही में भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किये गये गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की उत्तर प्रदेश में आठ रैलियां आयोजित की गई हैं। जिसका सिलिसिला 15 अक्टूबर को कानपुर में होने वाली रैली से होगा। वहीं लखनऊ में मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर रैली को संबोधित करेंगे, जिसमें राज्य भर से कार्यकर्ता आएंगे।
मोदी की रैलियों के बारे में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि मोदी की आठ रैलियां होंगी और सभी ऐतिहासिक होंगी। उन्होंने बताया कि आठों रैलियां वाराणसी, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, मुरादाबाद और बरेली में आयोजित कराने की योजना है।

मोदी की पहली रैली कानपुर में 15 अक्टूबर को रखी गयी है। यहां से कांग्रेस के सांसद श्री प्रकाश जायसवाल हैं जो कि वर्तमान में केंद्रीय कोयला मंत्री हैं। कोयला घोटाले में भी जायसवाल की काफी फजीहत हुई थी। मोदी की रैली भी काफी सोच समझकर ही जायसवाल के गढ़ में रखी गयी है। यहीं से मोदी का चुनावी शंखनाद होगा। कानपुर के बाद मोदी की अगली रैली झांसी में 25 अक्टूबर को रखी गयी है, जहां से कांग्रेस के सांसद प्रदीप जैन आदित्य वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री हैं। मोदी की तीसरी रैली बहराइच में आठ नवम्बर को होगी। बाकी रैलियों की तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी। ऐसा माना जा रहा है कि अयोध्या की सीमा से सटे इस जिले में मोदी की रैली भाजपा की रणनीति का एक अहम हिस्सा है। अयोध्या न ले जाकर भाजपा मोदी की रैली उससे सटे किसी जिले में कराना चाहती है।
उल्लेखनीय है कि उप्र भाजपा की ओर से भी पूरे राज्य में मोदी की आठ रैलियों का प्रस्ताव भेजा गया था। भाजपा ने सांगठनिक लिहाज से उप्र को आठ क्षेत्रों में विभाजित किया हुआ है और प्रदेश नेतृत्व की कोशिश सभी क्षेत्रों में एक-एक रैलियां कराने की हैं। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं, फिलहाल नरेंद्र मोदी की तीन रैलियों की मंजूरी मिली है। ये तीनों रैलियां कानपुर, झांसी और बहराइच में होंगी। उन्होंने बताया कि पहली तीन रैलियों में मोदी के साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी मौजूद रहेंगे और ये रैलियां कांग्रेस के गढ़ में आयोजित की जा रही हैं।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पिछले चुनाव में भाजपा को सिर्फ 10 सीटें ही मिल पाई थी, जबकि इस बार पार्टी 40 सीटों का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसलिए पार्टी राज्य में मोदी का बेहतर इस्तेमाल करना चाह रही है।












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