मोदी सरकार का एक महीना: कड़े निर्णय, बढ़े दाम, कमजोर मॉनसून

किसी भी सरकार के मूल्यांकन के लिये एक माह का कार्यकाल पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। लेकिन केंद्र सरकार ने एक माह में जिस तरह ताबड़तोड़ फैसले लिये हैं और आम जनता में इसकी जैसी तीखी प्रतिक्रिया हुई है उसके चलते बरबस ही सरकार के कामकाज पर चर्चा शुरू हो गयी है।
किसी भी सरकार के मूल्यांकन के लिये एक माह का कार्यकाल पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। लेकिन केंद्र सरकार ने एक माह में जिस तरह ताबड़तोड़ फैसले लिये हैं और आम जनता में इसकी जैसी तीखी प्रतिक्रिया हुई है उसके चलते बरबस ही सरकार के कामकाज पर चर्चा शुरू हो गयी है।
पहला निर्णय:
रेल किराये में 14.2 फीसदी और मालभाड़े में 6.4 फीसद की बढ़ोत्तरी कर महंगाई को छलांग लगा दी। रही-सही कमी चीनी पर आयात शुल्क में 15 के स्थान पर 40 फीसद की वृद्धि ने कर दी। निर्यात पर प्रति टन रूपये 3300 की दर से दी जाने वाली सब्सिडी को सितंबर तक बढ़ा दिया गया।
दूसरा निर्णय:
पेट्रौल में दस प्रतिशत एथनाल मिलाने की छूट दे दी। परिणामस्वरूप बाजार में एक ही झटके में चीनी के दामों में एक रुपये प्रति किलो की बढ़ोत्तरी हो गयी जो चंद दिनों में तीन रूपये प्रति किलो तक जा सकती है। एक तरफ उपभोक्ताओं पर भीषण कहर बरपा किया गया वहीं चीनी उद्योग समूह को 4400 करोड़ रूपये का ब्याजमुक्त अतिरिक्त ऋण देने का निर्णय भी ले डाला।
तीसरा निर्णय:
कोई भी मंत्री अपने निजी सचिव की नियुक्ति बिना पीएमओ की सूचना के नहीं कर सकता है। मोदी सरकार का यह एक बड़ा फैसला था।
चौथा निर्णय:
मोदी सरकार ने देश के सभी शहरों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने के लिए अपने मंत्रियों से प्रेजेंटेशन लिया।












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