मंथन में नरेंद्र मोदी से पूछे गये सवाल और उनके जवाब

Narendra Modi
नई दिल्‍ली। राजधानी के त्‍यागराज स्‍टेडियम में देश के कई बड़े प्रबंध एवं तकनीकी संस्‍थानों के छात्रों को एक मंच प्रदान करने वाले कार्यक्रम मंथन में नरेंद्र मोदी ने छात्रों के साथ आधा दिन बिताया। सिटिजेन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस द्वारा आयोजित कार्यक्रम के अंत में जब वो संबोधित करने के लिये मंच पर आये, तो उससे पहले छात्रों ने उन पर सवालों की बौछार कर दी।

मोदी ने उनके सभी सवाल नोट किये और अपने भाषण के दौरान उन्‍होंने सभी प्रमुख सवालों के जवाब दिये। ये सवाल अलग-अलग राज्‍यों से आये छात्रों ने पूछे थे। प्रस्‍तुत हैं छात्रों के सवाल और मोदी के जवाब-

असम- नॉर्थ ईस्‍ट के बारे में आप क्‍या सोचते हैं। क्‍या आपके पीएम बनने से स्थितियों में बदलाव होंगे?

उत्‍तर-
दो वर्ष पूर्व मैंने नॉर्थ ईस्‍ट के सभी मुख्‍यमंत्रियों को चिठ्ठी लिखी और प्रस्‍ताव रखा कि आपके राज्‍य से 200 महिला पुलिकर्मियों को गुजरात भेजिये, उनकी पूरी व्‍यवस्‍था हम करेंगे और हमेशा 200 महिला पुलिसकर्मी यहां रहें, फिर बदलते जायेंगे। मेरे मन में सोच यह थी कि जो लड़कियां यहां आयेंगी, वो यहां के गांवों में जायेंगी और लोगों से मिलेंगी और गुजरात के पर्यटन को वैल्‍यू एडीशन होगा, और नॉर्थ ईस्‍ट के टूरिज्‍म को बढ़ावा मिलेगा। टेरेरिज्‍म डिवाइड, टूरिज्‍म यूनाइट।

पटना एवं गुजरात से प्रश्‍न- आपने अपना राजनीतिक सफर कैसे शुरू किया? मैं भी राजनीति में आना चाहता हूं, लेकिन मिडिल क्‍लास फैमिली का हूं, धन बल नहीं है, इसलिये हिम्‍मत नहीं जुटा पाता।

उत्‍तर-
मेरे परिवार में सात पीढ़ी में कोई राजनीति कर र भी नहीं जानता था। मित्रों मैं कभी रेल के डिब्‍बों में चाय बेचता था। आज आपके सामने खड़ा हूं। आप यह चिंता छोड़ दीजिये, कि आपका क्‍या बैकग्राउंड है। अगर आपके दिल में समाज और देश के लिये कुछ करने की आग है, तो निकल पड़ें रास्‍ता अपने आप बन जायेगा। लेकिन मित्रों लेना, पाना, बनना यह ख्‍वाब बनकर चलोगे तो ख्‍वाब-ख्‍वाब बन कर रह जायेगा, लेकिन देने के मिजाज से चलोगे तो दुनिया आपके कदम चूमेगी।

बैंगलोर से प्रश्‍न- आप भारत को 2020 में कहां देख रहे हैं?

त्‍तर-
मित्रों यहां समस्‍याओं के समाधान को नहीं खोजा जाता है। अब सैनीटेशन की ही बात ले लीजिये। 21वीं सदी में हम जी रहे हैं, लेकिन आज भी हमारी करोड़ों माताओं बहनों को शौच के लिये खुले में जाना पड़ता है। यह हमारे लिये शर्मनाक है। मित्रों मेरी पहचान हिन्‍दुत्‍ववादी की है, लेकिन मेरी रियल सोच, जो है वो मैंने अपने राज्‍य में कही भी है। वो है पहले शौचालय फिर देवाालय। हर गांव में लाखों रुपए के देवालय तो हैं, लेकिन शौचालय नहीं। ऐसी समस्‍याओं से निबटने के लिये हिम्‍मत के साथ नेतृत्‍व करने की हिम्‍मत चाहिये, जो हमारे देश में है ही नहीं। हमारी सीमा आउटलेट तक ही सीमित है, जब तक आउटकम को नहीं देखेंगे। आउटकम से आगे एक कदम और सोशल ऑडिट। लिहाजा अगर 2020 में भारत को समृद्ध देश के रूप में देखना है, तो हमें टेक्‍नोलॉजी का सही इस्‍तेमाल करते हुए आगे बढ़ना होगा। हमें अपने अंदर की प्रतिभा को ऊपर लाना होगा।

राउरकेला से प्रश्‍न- फूड सिक्‍योरिटी पर करोड़ों अरबों रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन लोग फिर भी मर रहे हैं?

उत्‍तर- एक सुझाव दिया था कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के तीन हिस्‍से कर दीजिये। खरीदने वाला अलग, रखरखाव करने वाला अलग और बांटने वाला अलग। एक दूसरे पर नजर रहेगी एफिशियंसी बढ़ेगी हमारा काम ठीक होगा। हमने सुझाव दिया था कि हमारे पास रियल टाइम डाटा ही नहीं है। हमारे आईटी विशेषज्ञ अमेरिका का भला कर रहे हैं। दुनिया भर को सॉफ्टवेयर बना कर दे रहे हैं। अपने देश के लिये भी हम रियल टाइम डाटा रखने के लिये सॉफ्टवेयर तैयार कर सकते हैं। उनकी मैपिंग करके हम समय रहते हुए खराब होने वाले अनाज को बचाया जा सकता है।

लखनऊ से प्रश्‍न- आपके अनुसार सेक्‍युलरिज्‍म की क्‍या परिभाषा है?

उत्‍तर-
मेरे लिये रेक्‍युलरिज्‍म की परिभाषा सिर्फ एक है- इंडिया फर्स्‍ट। हम जो भी करें अगर भारत की भलाई के लिये नहीं है, तो सब बेकार। सर्व धर्म संभाव। कोई अपना कोई पराया नहीं। जस्टिस टू ऑल अपीज़मेंट टू नन। गरीब गरीब होता है, वो मंदिर, मस्जिद में जाता है या गुरुद्वारे में जाता है यह कोई मायने नहीं रखता। कुछ लोगों के लिये सेक्‍युलरिज्‍म सिर्फ भले भोले गरीब लोगों की आंख में धूल झोंकने का हथियार है।

गुमनाम- देश में किसानों की आत्‍महत्‍याएं कैसे रुकेंगी?

उत्‍तर-
हमने सदियों से देखा है कि जहां-जहां पानी होता है, वहीं मानव संस्‍कृतियां बसती हैं। जहां नदी-समुद्र थे वहां बस्तियां बसती थीं। फिर जहां 6-लेन हाईवे बने वहां बस्तियां बनने लगीं। भविष्‍य में जहां से ऑप्टिकल फाइबर गुजरेगा, वहीं बस्तियां बसेंगी। गांव में लॉन्‍ग डिस्‍टेंस एजुकेशन के माध्‍यम से दूर-सुदूर अच्‍छी शिक्षा क्‍यों नहीं दे सकते। मेरा अनुभव कहता है कि हम यह काम कर सकते हैं। टेक्‍नोलॉजी के इस जमाने में क्‍वालिटी एजूकेशन अब दूर का सपना नहीं है। जमीन नापने वाले टोडरमल ने कहा था कि हर तीस वर्ष में एक बार जमीन नापनी चाहिये।

मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि पिछले 100 साल में जमीन नापने का काम कभी नहीं हुआ। इस वजह से किसान को चिंता रहती है कि मेरी जमीन कतनी है, इसलिये वो बाड़ लगा देता है। जमीनों पर झगड़े होते हैं और बर्बाद हो जाता है। क्‍यों न हम खेती को तीन हिस्‍सों में बांटना चाहिये। एक तिहाई रेग्‍युलर फार्मिंग, एक तिहाई एनिमल हस्‍बेंड्री और एक तिहाई एग्रोफॉरेस्‍ट्री। खेत के किनारे पर बाड़ लगाकर जमीन बर्बाद करते हैं, वहां अगर टिम्‍बर के पेड़ लगा दें, तो किसी भी किसान को आत्‍महत्‍या नहीं करनी पड़ेगी।

गुमनाम- देश की मूलभूत समस्‍या किसे मानते हैं और उसका हल क्‍या है?

उत्‍तर- 21वीं सदी में हम जी रहे हैं, लेकिन आज भी हमारी करोड़ों माताओं बहनों को शौच के लिये खुले में जाना पड़ता है। यह हमारे लिये शर्मनाक है। मित्रों मेरी पहचान हिन्‍दुत्‍ववादी की है, लेकिन मेरी रियल सोच, जो है वो मैंने अपने राज्‍य में कही भी है। वो है पहले शौचालय फिर देवाालय। हर गांव में लाखों रुपए के देवालय तो हैं, लेकिन शौचालय नहीं। इस बड़ी समस्‍या से निबटने के लिये हिम्‍मत के साथ नेतृत्‍व करने की हिम्‍मत चाहिये, जो हमारे देश में है ही नहीं। हमारी सीमा आउटलेट तक ही सीमित है, जब तक आउटकम को नहीं देखेंगे। आउटकम से आगे एक कदम और सोशल ऑडिट।

पटना से प्रश्‍न- 18-22 के छात्रों के पास वोटरकार्ड नहीं हैं। क्‍या आपके पास कोई प्‍लान है? हममें से अधिकांश इसका प्रोसीजर भी नहीं जानते हैं?

उत्‍त्‍र-
बच्‍चा पहली बार स्‍कूल जाता है तो मां-बाप उत्‍साहित होते हैं। शादी होती है तो धूमधाम होती है। ग्रेजुएट होने पर डिग्री लेने पूरा परिवार पहुंच जाता है। लेकिन 18 का होने पर कोई खुशी नहीं, जबकि 18 का होने पर आपको गौरव होना चाहिये कि हम देश के मतदाता नहीं बल्कि भाग्‍यविधाता बने हैं।। हर व्‍यक्ति की 18वीं बर्थडे को शादी से बढ़कर सेलेब्रेट करना चाहिये। चुनाव आयोग को उस दिन एक चिठ्ठी भेजनी चाहिये।

मध्‍य प्रदेश से प्रश्‍न- क्‍या हमारे पास इतनी टेक्‍नोलॉजी नहीं है, कि हम इसका इस्‍तेमाल कैसे कर सकते हैं?

उत्‍तर-
सारी दुनिया में पर्यटन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। पूरी दुनिया में 3 ट्रिलियन डॉलर तक का उद्योग बन सकता है। लेकिन हम समृद्ध भारत के होते हुए भी विदेशी पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर पाते हैं। मित्रों पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी में बहुत बड़ा स्‍कोप है, नौकरियों का। कोई क्रिमिनल कैंडिडेट हो पार्टी पसंद हो, तो क्‍या करें। आपका यह टेंशन सुप्रीम कोर्ट ने दूर कर दिया है। आज कोई बेईमानों को वोट नहीं देना चाहता है। बेईमानी समाप्‍त करनी है, तो ट्रांसपेरेंसी लानी होगी। टेक्‍नोलॉजी का सही इस्‍तेमाल ट्रांसपेरेंसी ला सकता है।

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