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Nanaji Deshmukh: भारतरत्न नानाजी देशमुख की 15 वीं पुण्यतिथि, जानिए क्यों कहा जाता है ग्राम स्वराज का शिल्पकार?

Nanaji Deshmukh News: भारत रत्न नानाजी देशमुख की आज 15वीं पुण्यतिथि है। वो एक भारतीय समाजसेवी थे। उन्हें आधुनिक भारत का चाणक्य कहा जाता है। संघ के प्रति नानाजी का विशेष जुड़ाव था। उनके प्रयास से मात्र तीन साल में गोरखपुर जिले में आरएसएस की 250 शाखाएं खुल गई। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में वो राज्यसभा सदस्य मनोनीत किए गए।

नानाजी देशमुख को शिक्षा, स्वास्थ्य व ग्रामीण स्वालम्बन के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिये वाजपेयी सरकार के दौरान पद्म विभूषण प्रदान किया गया। मरणोपरांत 2019 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनके पुण्यतिथि के अवसर पर दीन दयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ परिसर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ है। यह कार्यक्रम 25 से 27 फरवरी तक आयोजित किया गया है। इसके समापन में गृहमंत्री अमित शाह और प्रसिद्ध कथावाचक मोरारी बापू को भी निमंत्रण दिया गया है।

Amit Shah

उनके पुण्यतिथि पर देश के गृहमंत्री अमित शाह ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा- ग्राम स्वराज के शिल्पकार, कुशल संगठनकर्ता भारत रत्न नानाजी देशमुख जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटिशः नमन। पंचायती राज को सशक्त कर गाँवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नाना जी देशमुख जी के ग्राम स्वराज की अवधारणा आज भी प्रासंगिक है। चाहे आपातकाल का संघर्ष हो, जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभानी हो या भारतीय जनसंघ की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाना हो, हमेशा राष्ट्रप्रथम के लिए समर्पित नाना जी देशमुख जी समस्त देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज हैं।

Nanaji Deshmukh: क्यों कहा जाता है ग्राम स्वराज का शिल्पकार?

नानाजी देशमुख का जन्म 11 अक्टूबर, 1916 को हुआ था। उनकी प्रतिभा, कार्यक्षमता और सांगठनिक कौशल को देखकर उन्हें संघ विस्तार की जिम्मेदारी दी गई थी। वो महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण से विशेष प्रभावित थे। उन्होंने कहा था हम अपने लिए नहीं, अपनों के लिए जीते हैं, अपने वे हैं जो सदियों से पीड़ित एवं उपेक्षित हैं।" 1950 में गोरखपुर में पहला सरस्वती मंदिर की स्थापना इन्होंने की थी। भारत के पहले ग्रामीण विश्वविद्यालय, चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय को नानाजी ने शुरु किया था। चित्रकूट में स्थित दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआई) के संस्थापक थे।

नानाजी देशमुख ने कृषि और ग्रामीण शिक्षा में सुधार किया। उन्होंने कृषि और कुटीर उद्योग, ग्रामीण स्वास्थ्य और ग्रामीण शिक्षा में सुधार किया। गोंडा (यूपी), बलरामपुर और बीड (महाराष्ट्र) में सामाजिक कार्य किया। उनके प्रोजेक्ट का आदर्श वाक्य था हर हाथ को देंगे काम, हर खेत को देंगे पानी । 1977 में वो मध्यप्रदेश के चित्रकूट चले गए। वहां इन्होंने "ग्राम स्वराज" की अवधारणा के आधार पर विकास का एक आत्मनिर्भर मॉडल तैयार किया। उनके प्रयास का ही परिणाम है कि सैकड़ों गांव जो अब "चित्रकूट परियोजना" के रूप में जाने जाते हैं , जैव ऊर्जा और सौर ऊर्जा संयंत्रों के माध्यम से बिजली उत्पन्न करने का कार्य करते है।

नानाजी देशमुख ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते थे। वो विदेशी वस्तुओं और प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करने तथा स्वदेशी संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के उपयोग को बढ़ावा देने में विश्वास करते थे। सादा जीवन और उच्च विचार के धनी नानाजी बांस की कुटी बनाकर जयप्रभाग्राम के मानस झील के सामने रहते थे। बलरामपुर संसदीय सीट से 1977 में राजमाता बलरामपुर को चुनाव हराकर नानाजी देशमुख लोकसभा के लिए चुने गए। उन्होंने मृत्यु से पहले अपने शरीर को एम्स में दान देने की बात कही थी।

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