Chandrayaan 2: पहली पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री के बारे में जानिए, जिन्होंने की भारत और ISRO की तारीफ
नई दिल्ली- चंद्रयान- 2 से आखिरी वक्त में भले ही इसरो का संपर्क टूट गया हो, लेकिन फिर भी एक पाकिस्तानी ऐसा है, जो भारत की सफलता से खुद को गौरवशाली महसूस कर रहा है। ये हैं पाकिस्तान की पहली अंतरिक्ष यात्री नमीरा सलीम। उन्होंने चंद्रयान-2 को भारत का एक बेहद ही कामयाब मिशन बताया है और इसे सिर्फ भारत के लिए ही नहीं पूरी दक्षिण एशिया के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है। दरअसल चंद्रयान- 2 की अबतक की कामयाबी के लिए पूरी दुनिया भारत और इसरो की सराहना कर रही है, लेकिन लैंडर विक्रम के साथ आखिरी वक्त में हुई दुर्घटना को लेकर पाकिस्तान में जमकर तंज कसे जा रहे हैं। ऐसे में अगर कोई पाकिस्तानी मूल की महिला और वो भी अंतरिक्ष यात्री नमीरा सलीम भारतीय वैज्ञानिकों को बधाइयां दे रही है तो सिर्फ इसलिए कि वह हकीकत जानती हैं। उन्हें पता है कि आज स्पेस में भारत कहां और पाकिस्तान कहां खड़ा है।

कौन हैं नमीरा सलीम
नरीमा सलीम पहली पाकिस्तानी और मोरक्को की पहली महिला हैं जो सर रिचर्ड ब्रैनसन की वर्जिन गैलेक्टिक में अंतरिक्ष यात्रा पर जाएंगी। यह दुनिया की पहली कॉमर्शियल स्पेसलाइन है। वो वर्जिन गैलेक्टिक की पहली फाउंडर एस्ट्रोनॉट भी हैं। 2006 में नमीरा को पहली बार रिचर्ड ब्रैनसन ने ही दुबई में दुनिया की प्रेस के सामने लाया था, तब वर्जिन गैलेक्टिक की लॉन्चिंग हो रही थी। उन्हें दक्षिण एशियाई मूल की मोरक्को से आने वाली भविष्य की पहली स्पेस टूरिस्ट के तौर पर भी जाना जाता है।

चंद्रयान-2 की कामयाबी पर क्या कहा है
नमीरा सलीम चंद्रमा के साउथ पोल पर विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग के इसरो के प्रयासों से इतनी उत्साहित हैं कि उन्होंने बधाई देते हुए कहा है,, 'मैं भारत और इसरो को चंद्रमा के साउथ पोल पर विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग के ऐतिहासिक प्रयासों के लिए बधाई देती हूं।' उन्होंने चंद्रयान मिशन को पूरी दक्षिण एशिया के लिए बहुती ऊंची छलांग बताते हुए कहा है, 'चंद्रयान-2 और चंद्रमा मिशन वास्तव में दक्षिण एशिया की बहुत ही ऊंची छलांग है, जिससे न केवल यह क्षेत्र, बल्कि पूरे ग्लोबल स्पेस इंडस्ट्री का गौरव बढ़ा है।'

'अंतरिक्ष में राजनीति की सारी सीमाएं मिट जाती हैं'
नमीरा स्पेस को धरती पर शांति बहाली का भी एक अहम ठिकाना मानती हैं। वह इसके लिए अपनी तरफ से काफी प्रयास भी कर रही हैं। इसके लिए उन्होंने एक नॉन-प्रॉफिट स्पेस ट्रस्ट भी बनाया है। वो दुनिया भर के नेताओं से कहती हैं कि वह पृथ्वी पर शांति के लिए अंतरिक्ष का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि वहां सभी तरह की राजनीतिक सीमाएं मिट जाती है। वे भारत की कामयाबी पर ये भी कहती हैं कि, 'दक्षिण एशिया में स्पेस सेक्टर में होने वाला क्षेत्रीय विकास असाधारण है और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन सा राष्ट्र इसकी अगुवाई करता है....अंतरिक्ष में सभी राजनीतिक सीमाएं मिट जाती हैं और जहां अंतरिक्ष हमें एक करता है, वहीं पृथ्वी हमें बांट देती है। '

नमीरा को बचपन से रहा सितारों से प्रेम
सितारों के लिए नमीरा सलीम प्रेम बचपन से है। इसलिए वो अंतरिक्ष की ओर शुरू से ही आकर्षित तो हैं हीं, आर्ट, डिजाइन, पोएट्री और म्यूजिक में भी उनकी खास दिलचस्पी है। वो खुद को पाकिस्तानी तो बताती हैं, लेकिन पिछले 20 साल भी ज्यादा वक्त से फ्रांस के दक्षिण में स्थित मोनक्को में रह रही हैं।

इन अभियानों में भी किया है नाम
नमीरा सलीम को अंतरिक्ष से जो लगाव है, वैसा ही लगाव वो एडवेंचर से जुड़े और क्षेत्रों से भी रखती हैं। इसी के तहत उन्होंने 2007 से 2008 के बीच दुनिया के तीनों पोल तक पहुंचने का प्रयास किया था और सफल भी हुई थीं। वह अप्रैल, 2007 में नॉर्थ पोल और जनवरी, 2008 में साउथ पोल की यात्रा करने वाली मोरक्को की पहली महिला हैं। यही नहीं अक्टूबर, 2008 में वह माउंट एवरेस्ट पर स्काईडाइव करने वाली पहली एशियाई और मोरक्को की पहली महिला भी हैं।












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