#mumbairains: भीगने के बाद आज भूखी भी रहेगी मुंबई, जानिए क्यों?
मुंबई। इस वक्त पूरी मुंबई पानी की वजह से सिसक रही है, जिस तरह से मंगलवार को बारिश ने यहां कहर बरपाया है, उसने पूरे शहर का हूलिया ही बदल दिया है। हालांकि बीएमसी की ओर से राहत कार्य पूरी तरह से चालू है लेकिन फिर भी बारिश के कारण इस वक्त पूरी मुंबई दुखी और परेशान है। लगातार भीगने के बाद अब मुंबई वासियों के लिए एक और बुरी खबर है क्योंकि उन्हें आज भूखा रहना पड़ेगा।
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'डिब्बा वाला'
क्योंकि अब से थोड़ी देर पहले 'डिब्बा वाला' के प्रवक्ता सुभाष तालेकर ने बताया कि डिब्बा वाला आज खाना नहीं पहुंचा पाएंगे क्योंकि वे मंगलवार को बारिश के कारण डिब्बे वापस नहीं ले पाए थे, इस कारण आज अधिकांश उन लोगों को खाना नहीं मिलेगा जो 'डिब्बा वाला' सर्विस पर ही निर्भर रहते हैं।

समय पर डिलीवरी
गौरतलब है कि डब्बावाला या डब्बेवाले ऐसे लोगोंॱ का एक समूह है, जो कि मुंबई शहर में काम कर रहे सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारियों को दोपहर का खाना कार्यस्थल पर पहुंचाने का काम करता है। इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत है, समय पर डिलीवरी। आप ट्रेन की देरी या फिर किसी वजह से ऑफिस में लेट हो सकते हैं, पर डब्बावाला हमेशा समय पर आपका टिफिन लेकर हाजिर हो जाता है।

इनके खाने में मिलावट नहीं होती
अकेले मुंबई में करीब पांच हजार डब्बवाले रोजाना दो लाख टिफिन की डिलीवरी करते हैं। टिफिन पर इस तरह कोडिंग की जाती है कि जिसका टिफिन है, उसे ही मिलता है। डिलीवरी करने वाले डब्बावाले बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, किंतु टिफिन डिलीवरी में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं होती, इनके खाने में मिलावट नहीं होती और इनका खाना खाने से कोई बीमार भी नहीं होता।

खास बातें
- 1890 में मुंबई डब्बावाला की शुरुआत।
- 2 लाख लोगों को खाने की सप्लाई।
- तीन घंटे के अंदर खाना घर से लेकर दफ्तर तक पहुंचता है।
- हर रोज 60 से 70 किलोमीटर तक का सफर तय।
- खाने की सप्लाई के लिए 600 रुपये महीना खर्च।
- खाने की सप्लाई में साइकिल और मुंबई की लोकल ट्रेन की मदद।
- काम में जुड़े प्रत्येक कर्मचारी को 9 से 10 हजार रुपये मासिक मिलता है।
- साल में एक महीने का अतिरिक्त वेतन भी। नियम तोड़ने पर एक हजार फाइन लगता।













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