रक्षा मंत्री रहते हुए मुलायम सिंह ने बनाया था कानून, तब से ही घर पहुंचाया जाने लगा शहीद जवानों का पार्थिव शरीर
सपा सुप्रीमों और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे, उन्हें गुरुग्राम स्थित मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के दिग्गज नेताओं ने दुख व्यक्त किया है। वहीं, मुलायम सिंह यादव के निधन पर उनके द्वारा लिए गए तमाम फैसलों को याद किया जा रहा है। ऐसा ही एक फैसला उनकी तरफ से शहीद सैनिकों के पार्थिव शरीर को लेकर लिया गया था।

1996 से 1998 तक थे रक्षा मंत्री
मुलायम सिंह यादव राजनीति में आने से पहले एक शिक्षक थे। वह 50 की दशक से राजनीति में सक्रिय थे। वह तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहने के अलावा देश के रक्षा मंत्री रहे। दरअसल, देश में पहले, जब जवान शहीद हो जाते थे तो उनका पार्थिव शरीर घर नहीं आता था। बल्कि सेना की तरफ से शहीद जवानों की टोपी घर वालों को पहुंचाई थी। लेकिन जब मुलायम सिंह यादव रक्षा मंत्री बने तो उन्हें यह रिवाज पंसद नहीं आई।
शहीद जवानों का शव पहुंचे घर इसलिए बनाया कानून
बॉर्डर पर शहीद होने वाले जवानों का शव घर पहुंच सके, इसलिए मुलायम सिंह य़ादव ने रक्षा मंत्री रहते हुए एक कानून बनाया। इस कानून में यह प्रस्ताव किया गया कि अगर को भी जवान शहीद होता है, तो उसका शव सम्मान के साथ परिजनों को सौंपा जाएगा। इस दौरान डीएम और एसपी शहीद जवान के घर जाएंगे। मुलायम सिंह यादव के इस फैसले के बाद से ही जवानों का शव उनके परिवारों को सौंपा जाने लगा।
तीन बार रहे मुख्यमंत्री
मुलायम सिंह यादव 1989 से 1991, 1993 से 1995 और 2003 से 2007 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उनका जन्म 22 नवंबर 1939 को यूपी के इटावा जिले में हुआ था। वह राम मनोहर लोहिया के विचारों से बहुत प्रभावित थे और यही वजह थी कि वो राजनीति में आए।
ये भी पढ़ें- मुलायम सिंह यादव के साथ आखिरी तस्वीर अखिलेश ने की शेयर, बोले- पिता जी नहीं रहे












Click it and Unblock the Notifications