मुलायम सिंह यादव को हुई कौन सी बीमारी, डॉक्टरों ने क्या बताया

किस बीमारी के कारण मुलायम सिंह यादव को लाया गया मेदांता हॉस्पिटल, डॉक्टरों ने बताया

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद अपने परिवार को एकजुट करने की कोशिशों में जुटे समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की तबीयत सोमवार को एक बार फिर बिगड़ गई। इसके बाद आनन-फानन में मुलायम सिंह यादव को चार्टर प्लेन से दिल्ली लाया गया और गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। इससे पहले रविवार को भी मुलायम सिंह की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें लखनऊ के पीजीआई में भर्ती कराया गया था। हालांकि सोमवार को उनकी तबीयत में सुधार हुआ और वो अपने घर आ गए, लेकिन शाम में उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराया गया। मेदांता में मुलायम सिंह यादव का इलाज सीनियर फिजिशियन डॉ. सुशीला कटारिया की देख-रेख में चल रहा है।

रात में ही कराए गए मुलायम के हेल्थ टेस्ट

रात में ही कराए गए मुलायम के हेल्थ टेस्ट

मुलायम सिंह यादव को सोमवार रात करीब आठ बजे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के आईसीयू में एडमिट कराया गया। अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, मुलायम सिंह यादव की तबीयत बुखार और शुगर ज्यादा होने के कारण बिगड़ी है। मेदांता में भर्ती होने के बाद डॉक्टरों ने रात में ही उनकी कुछ जरूरी जांचें कराईं और रिपोर्ट आने के बाद बताया कि अब मुलायम सिंह की हालत स्थिर है। फिलहाल उन्हें हॉस्पिटल के आईसीयू वार्ड में ही रखा गया है। डॉ. सुशीला कटारिया की देखरेख में इससे पहले भी मुलायम सिंह यादव का इलाज मेदांता में हो चुका है। डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी हालत पर नजर बनाए हुए है।

सोमवार को मिलने पहुंचे थे सीएम योगी

सोमवार को मिलने पहुंचे थे सीएम योगी

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुलायम सिंह यादव से मिलने उनके आवास पर पहुंचे थे। इस दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया शिवपाल यादव भी वहां मौजूद रहे। दरअसल, रविवार को मुलायम सिंह यादव की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। ब्लड शुगर के हाई लेवल पर पहुंचने की वजह से उन्हें लखनऊ के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद उनकी तबीयत में कुछ सुधार हुआ और वो अपने घर आ गए। सोमवार को परिवार के कुछ और लोग भी उन्हें देखने उनके आवास पर पहुंचे थे।

सपा कुनबा एक करने की कोशिश में मुलायम

सपा कुनबा एक करने की कोशिश में मुलायम

आपको बता दें कि मुलायम सिंह यादव लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली हार के बाद से ही अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच सुलह कराने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। परिवार में सुलह कराने के लिए मुलायम सिंह यादव दिल्ली से लेकर अपने पैतृक गांव उत्तर प्रदेश के सैफई तक में बेटे अखिलेश यादव और भाई शिवपाल यादव को अलग-अलग बिठाकर कई दौर की बैठकें कर चुके हैं। दरअसल, मुलायम सिंह का मानना है कि शिवपाल यादव की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अलग चुनाव लड़ने की वजह से यूपी में यादव वोटों का विभाजन हुआ और जिसका खामियाजा समाजवादी पार्टी को भुगतना पड़ा।

सपा के लिए क्यों जरूरी हैं शिवपाल

सपा के लिए क्यों जरूरी हैं शिवपाल

मुलायम सिंह यादव इसलिए भी सपा में शिवपाल की वापसी चाहते हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी अपने 3 मजबूत गढ़ों में हारी है। इनमें से एक कन्नौज लोकसभा सीट भी है, जहां डिंपल यादव को भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रत पाठक ने 12353 वोटों से हराया है। सुब्रत पाठक को 563087 और डिंपल यादव को 550734 वोट मिले। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में डिंपल यादव ने इसी सीट पर सुब्रत पाठक को 19907 वोटों के अंतर से हराया था और इस जीत में सबसे बड़ा योगदान अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव का था। दरअसल कन्नौज सीट पर हर चुनाव में मैनेजमेंट संभालने की जिम्मेदारी शिवपाल यादव को ही मिलती थी। शिवपाल यादव ना केवल जमीनी नेताओं और कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद बनाए रखते थे, बल्कि उनकी समस्याओं को सुनकर उनका तुरंत समाधान भी कराते थे। 2014 में भी शिवपाल यादव ने ही कन्नौज सीट पर मैनेजमेंट संभाला था और इसी की बदौलत मोदी लहर के बावजूद डिंपल यादव ने यहां जीत दर्ज की।

महज 5 सीटों पर सिमटी सपा

महज 5 सीटों पर सिमटी सपा

2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के खाते में केवल पांच सीटें आजमगढ़, मैनपुरी, मुरादाबाद, सम्भल और रामपुर गईं। 2014 में भी सपा 5 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई थी। इस बार मुलायम सिंह यादव के तीन सदस्यों डिंपल यादव को कन्नौज, अक्षय यादव को फिरोजबादा और धर्मेंद्र यादव को बदायूं में हार का सामना करना पड़ा। वहीं, बहुजन समाज पार्टी ने यूपी की सहारनपुर, बिजनौर, नगीना, अमरोहा, जौनपुर, अंबेडकर नगर, लालगंज, श्रावस्ती, गोसी और गाजीपुर सीट पर जीत दर्ज की। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता भी नहीं खुला था। वहीं, आरएलडी 2014 में अपना खाता नहीं खोल पाई थी और इस बार भी पार्टी कोई सीट नहीं जीत पाई। आरएलडी मुजफ्फरनगर, बागपत और मथुरा सीट पर चुनाव लड़ी थी।

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