मुकुल रोहतगी ने ठुकराया केंद्र सरकार का प्रस्ताव, अटॉर्नी जनरल बनने का दिया था ऑफर
नई दिल्ली, सितंबर 25। देश के जाने-माने सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्हें भारत का अगला अटॉर्नी जनरल बनाने की बात कही गई थी। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकुल रोहतगी ने केंद्र के इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। हालांकि इसके पीछे की वजह के बारे में मुकुल रोहतगी ने नहीं बताया है।

के के वेणुगोपाल हैं अभी अटॉर्नी जनरल
आपको बता दें कि मुकुल रोहतगी को के के वेणुगोपाल की जगह देश का अगला अटॉर्नी जनरल नियुक्त करने का प्रस्ताव सरकार की ओर से भेजा गया था, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया। के के वेणुगोपाल ने औपचारिक रूप से 30 जून 2017 को अपना पद संभाला था। उनका कार्यकाल 2020 तक था, लेकिन सरकार ने फिर उनके कार्यकाल को बढ़ा दिया था, लेकिन अब वो खुद ही इस पद को छोड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।
3 साल अटॉर्नी जनरल रह चुके हैं मुकुल रोहतगी
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए मुकुल रोहतगी ने कहा है कि भारत सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने के पीछे कोई विशेष कारण नहीं है, फिर से प्रस्ताव पर विचार किया और उसे अस्वीकार कर दिया है। मुकुल रोहतगी इससे पहले भी भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली (NDA) सरकार में 2014 से 2017 के बीच अटॉर्नी जनरल की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
केके वेणुगोपाल का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है। हालांकि, मोदी सरकार ने उनके कार्यकाल बढ़ाने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया, जिसके बाद मुकुल रोहतगी को एजी बनने का प्रस्ताव भेजा गया। वेणुगोपाल 91 साल के हैं और उन्होंने खुद ही यह पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की है। इस साल जून में केंद्र ने वेणुगोपाल का कार्यकाल तीन महीने और बढ़ा दिया था। सरकार ने उनसे तीन महीने और काम करने का आग्रह किया। आखिरकार उन्होंने सरकार को एक नए चेहरे की तलाश करने की अनुमति देने के लिए 30 सितंबर तक तीन महीने के विस्तार के लिए सहमति व्यक्त की थी।












Click it and Unblock the Notifications