Mughal Chapter: बाबर-अकबर पर फिर गरमाई बहस, NCERT में 'बर्बर' और ‘क्रूर’ कहने पर उठे सवाल
Mughal Chapter: भारत में इतिहास की किताबों से बाबर और अकबर को हटाने की बहस कभी थमती नहीं है। अब एसे ही एक नया मामला विवाद फिर उभर आया है, जिसमें NCERT की किताबों में इन्हें 'बर्बर' और 'क्रूर' बताकर उनकी छवि पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
क्या है बवाल का कारण?
नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी NCERT की आठवीं क्लास की सोशल साइंस की नई किताब में बाबर को बर्बर, हिंसक विजेता और सारी आबादी को मौत के घाट उतारने वाला बताया गया है। साथ ही अकबर के शासन को क्रूरता और सहिष्णुता का मिला-जुला रूप बताया है। इसके अलावा औरंगजेब को मंदिर और गुरुद्वारा तोड़ने वाला शासक बताया गया है।

अकबर ने किया 30 हजार लोगो का नरसंहार- NCERT
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू के मुताबिक, NCERT की नई किताब में लिखा गया है, चित्तौड़ के किले पर कब्जा करने के समय अकबर की उम्र महज 25 साल थी और उन्होंने 30 हजार नागरिकों के जनसंहार के साथ बच्चों और महिलाओं को गुलाम बनाने का फरमान जारी किया था। इस किताब में अकबर के हवाले से कहा गया है, कि हमने काफिरों के कई किलों और कस्बों पर कब्जा कर लिया है और वहां इस्लाम की स्थापना की है। साथ ही हमने वहां के मंदिरों को भी नष्ट कर दिया है। किताब के मुताबिक बनारस, मथुरा और सोमनाथ सहित जैन मंदिरों और सिखों के गुरुद्वारे भी नष्ट किए गए।
क्यों हुआ ये बदलाव?
NCERT की आठवीं क्लास की सोशल साइंस की किताब का पार्ट-1 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडियन एंड बियॉन्ड' इसी हफ़्ते जारी की गईं हैं। NCERT की नई किताबों में से यह पहली किताब है जो विद्यार्थियों को दिल्ली सल्तनत और मुगलों और उनके शासन के बारे में बताती है।
मुगलों को बताया लुटेरा और आक्रांता
यह किताब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क 2023 के तहत लाई गई है।NCERT की नई किताब में 13वीं से 17वीं सदी तक के भारतीय इतिहास को कवर किया गया है। इस किताब में मुगल काल को लूट-पाट और मंदिरों को तोड़ने के रूप में दर्शाया गया है। इसके पहले से चली आ रही किताब में सल्तनत काल को इस तरह से पेश नहीं किया गया था।
इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप
NCERT के इस बदलाव पर बवाल मच गया। कई लोग सवाल उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि सरकार जानबूझकर इतिहास को गलत तरीक से पेश कर रही है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के संस्थापक सदस्य प्रोफ़सर मोहम्मद सुलेमान ने कहा, ''इस समय जो संगठन और विचारधारा सत्ता में हैं, वे इतिहास के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ कर रहे हैं। आगे उन्होंने कहा कि हमारी सरकार इतिहास को तोड़-मरोड़कर लिखवा रही है। लेकिन इससे देश का हित नहीं हो रहा है। ये अंधभक्तों को गुमराह कर सकते हैं लेकिन दुनिया में जब इतिहास पढ़ा जाएगा तो लोग सच्चाई ही पसंद करेंगे। सरकार अपने स्वाभिमान की तुष्टि के लिए कुछ भी कर रही है।
बवाल पर NCERT ने दिया जवाब
इस मामले पर NCERT ने कहा, ''इस किताब में भारतीय इतिहास की 13वीं सदी से 19वीं सदी के बीच के इतिहास का वर्णन किया गया है। हमने इस किताब में दोहराव के जगह आलोचनात्मक सोच को सामने रखा है और अकादमिक स्रोतों के आधार पर विवरण को शामिल किया गया है। हमने एक विशेष चैपटर रखा है, जिसका नाम है- इतिहास के अंधकारमय अवधि पर एक टिप्पणी। इस किताब के जरिए युवा पाठकों के अतीत के साथ आधुनिक भारत के बनने की समझ भी विकसित होगी।'
इन शासकों ने की थी बर्बरताएं- NCERT
द हिन्दू से NCERT में सोशल साइंस पाठ्यक्रम के एरिया ग्रुप हेड माइकल डैनिनो ने कहा, ''भारतीय इतिहास को सुखद नहीं बनाया जा सकता। हम ऐसा नहीं दिखा सकते हैं कि सब कुछ अच्छा ही था। कई अच्छी चीजे थीं लेकिन कई बुरी चीजे भी थीं। लोगों पर अत्याचार हुए थे। इसलिए हमने इतिहास के उस अध्याय को भी शामिल किया है।'' उन्होंने आगे यह भी बताया कि, हमने डिसक्लेमर भी दिया है कि अतीत में जो कुछ भी हुआ है, उसके लिए आज किसी को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं। अकबर ने खुद स्वीकार किया है कि वह जवानी के दिनों में क्रूर था। हम अकबर या औरंगजेब को नीचा नहीं दिखा रहे हैं बल्कि हम ये बता रहे हैं कि इन शासकों की अपनी सीमाएं थीं और इन्होंने बर्बरता की थी।'
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