इंदिरा का विरोध करने वाले मीसा बंदियों को MP की कांग्रेस सरकार अब देगी पेंशन
नई दिल्ली- सात महीने तक रोक लगाए रखने के बाद मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार ने मीसा बंदियों को फिर से पेंशन शुरू करने का फैसला किया है। गौरतलब है कि करीब सात महीने पहले मध्य प्रदेश में सत्ता में आने के कुछ ही समय बाद कांग्रेस सरकार ने आपातकाल के दौरान जेलों में बंद रहे इन आंदोलनकारियों को राज्य में मिलने वाले पेंशन पर रोक लगा दी गई थी। बीजेपी ने कमलनाथ सरकार के इस फैसले पर जमकर बवाल काटा था।

भौतिक सत्यापन के नाम पर रोका गया था पेंशन
कमलनाथ सरकार ने सत्ता में आते ही मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) के तहत बंदी रहे बुजुर्गों का पेंशन भौतिक सत्यापन के नाम पर रोक दिया था। गौरतलब है कि पिछले 15 जनवरी को सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी कलेक्टरों को इस संबंध में आदेश जारी कर 15 दिनों में भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट देने को कहा था। दरअसल पेंशन रोकते वक्त कमलनाथ सरकार का दावा था कि पेंशनधारियों की सूची में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो मीसा के तहत कैद में रहे ही नहीं थे। सरकार के दावों के मुताबिक शुरुआती जांच में ऐसे मामले भी सामने आए जो गलत दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए थे। कुछ ऐसे मामलों की भी जानकारी मिली जिसमें पेंशन लेने वाले असल में थे ही नहीं।

भोपाल कलेक्टर ने जारी किया आदेश
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल जिले के गोविंदपुरा, बैरागढ़, एमपी नगर, शहर और हुजूर तहसील में मीसा बंदियों के सत्यापन का काम अब जाकर पूरा हुआ है। इसके बाद कलेक्टर ने यहां के 13 मीसा बंदियों को पेंशन जारी करने का आदेश संबंधित विभाग को जारी कर दिया है। जानकारी के मुताबिक जब रोक लगी थी, तब 123 लोगों को पेंशन दिया जा रहा था।

कांग्रेस सरकार का विरोध कर गए थे जेल
बता दें कि इंदिरा गांधी ने 1975 में जब आपातकाल लगाया था, तब मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट यानि मीसा के तहत विरोधी नेताओं, पत्रकारों और कांग्रेस के विरोधियों को जेल में डाल दिया था। राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दौरान 1800 से 2000 ऐसे ही लोगों को को 25,000 रुपये बतौर पेंशन मिलता था। उम्मीद है कि जिस तरह से भोपाल के 13 पेंशनधारियों को फिर से पेंशन मिलने लगा है, वैसे बाकियों को भी मिलना शुरू हो जाएगा।












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