Mothers Day 2025: भारत माता कौन हैं? कहां हैं इनका मंदिर? जानिए देश की मां के बारे में कुछ खास बातें
Mothers Day 2025: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच सरहद पर हमारे देश के जवान अपनी 'भारत माता' की रक्षा के लिए जान की परवाह ना करते हुए दुश्मनों का डटकर सामना कर रहे हैं। हिंदुस्तान की धरती का बाल भी बांका ना हो इसलिए हमारे सैनिक पूरे तन-मन के साथ बार्डर पर शत्रुओं के छक्के छुड़ा रहे हैं।
हिंदुस्तान ने एक नहीं कई बार ये साबित किया है कि 'भारत माता' की ओर जो भी गलत निगाहों से देखेगा, उसके नेत्रों को फोड़ दिया जाएगा। आज 'मदर्स डे' है यानी कि मां के सम्मान का दिन।

मां का दर्जा तो भगवान से भी बड़ा माना गया है, तो इस पावन दिन पर जानते हैं 'भारत माता' के बारे में कुछ खास बातें।
भारत माता एक राष्ट्रीय अवतार के रूप में चिन्हित हैं
आपको बता दें कि जब देश में आजादी की लड़ाई लड़ी जा रही थी, उसी समय हमारे देश को 'भारत माता' माना गया था। भारत माता एक राष्ट्रीय अवतार के रूप में चिन्हित हैं, आम तौर पर वो लाल या भगवा रंग की साड़ी पहने और हाथों में तिरंगा लिए नजर आती हैं। मां की ये छवि बेहद ही मोहक और प्रभावी है। देशभक्ति, त्याग, सेवा और निष्ठा की प्रतीक भारत माता का जिक्र 19वीं सदी के बंगाली साहित्य में मिलता है।
मां दुर्गा और काली का मिश्रित रूप हैं भारत माता
आपको बता दें कि मशहूर बंगाली उपन्यास 'आनंदमठ'( 1882) ने पहली बार 'भारत माता' की सुंदर छवि वर्णित की थी, विकिपीडिया के मुताबिक इस उपन्यास में भारत मां को मां दुर्गा और काली के मिश्रित रूप में प्रदर्शित किया गया था।
चार भुजाओं वाली देवी के रूप में भारत माता की छवि
इसके बाद साल साल 1904 में बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट ने कलाकार अबनिंद्रनाथ टैगोर ने एक चार भुजाओं वाली देवी का चित्र बनाया था, जिसे कि उन्होंने 'भारत माता' नाम दिया था। इसके बाद साल 1909 में कवि सुब्रमण्यम भारती ने अपनी एक तमिल पत्रिका के कवर पर भारत माता का एक चित्र बनवाया था, जिसमें भी वो मां दुर्गा के ही रूप में प्रदर्शित की गई थीं और इसी के बाद से ही वो देश के हर पोस्टर, कैलेंडर में इस रूप में दिखने लगीं।
भारत माता मंदिर: राष्ट्रभक्ति का तीर्थ
भारत में कुछ विशिष्ट भारत माता मंदिर स्थापित किए गए हैं जो न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी भावना के रूप में भी महत्वपूर्ण हैं।
भारत माता मंदिर, वाराणसी
यह मंदिर 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा बनवाया गया था और ये भारत का पहला भारत माता का मंदिर है, जिसका उद्घाटन महात्मा गांधी ने किया था। इस मंदिर में भारत माता की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि यहां पर देश का उभरा हुआ त्रिविमीय नक्शा है, जो कि संगमरमर पर अंकित है।
भारत माता मंदिर, हरिद्वार
यह मंदिर 1983 में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि द्वारा स्थापित किया गया था, इस मंदिर में कई स्वतंत्रता सेनानियों, ऋषियों, संतों और देवियों की मूर्तियां भी भारत माता की मूर्ति के साथ नजर आती हैं।
भारत माता का मंदिर, कोलकाता
यह मंदिर कोलकाता के माइकल नगर में स्थित है। यहाँ भारत माता को "जगत्तारिणी दुर्गा" के रूप में पूजा जाता है। इसका उद्घाटन 19 अक्टूबर, 2015 में तत्कालीन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी द्वारा किया गया था।
भारत माता का मंदिर,कुरुक्षेत्र
जुलाई 2019 में, हरियाणा के तत्कालीम मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भारत माता के मंदिर के निर्माण के लिए "भारत माता ट्रस्ट" को महाभारत-युगीन ज्योतिसर तीर्थ के पास 5 एकड़ जमीन दी थी।
भारत माता मंदिर का महत्व
- भारत माता मंदिर यह बताता हैं कि भारत एक जीवंत संस्कृति है, न कि मात्र एक भूगोलिक इकाई।
- भारत माता की पूजा करने से जनमानस में मातृभूमि के लिए प्रेम और बलिदान की भावना जागृत होती है।
- भारत माता मंदिर धर्म निरपेक्षता का संदेश देती है।
कहां से आया 'भारत माता की जय'
अब बात करते हैं 'भारत माता की जय' उद्घोष की, सन 1873 में किरन चंद्र बनर्जी ने एक नाटक लिखा था जिसका नाम था 'भारत माता', जिसमें पहली बार 'भारत माता की जय' कहा गया था और अब ये हर भारतीय का भी ध्येय वाक्य (मोटो) बन चुका है।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।














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