सोनू सूद को प्रवासी बेटे की मां ने बिहार से भेजा ये भावुक संदेश, जानिए कलाकार ने क्या दिया जवाब

सोनू सूद को प्रवासी बेटे की मां ने बिहार से भेजा ये भावुक संदेश, जानिए कलाकार ने क्या दिया जवाब

मुंबई। कोरोना वायरस की महामारी के बीच फिल्म अभिनेता सोनू सूद लगातार प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने में जुटे हुए हैं। प्रवासियों को घर भेजने के लिए सोनू सूद ने मुहिम चलाई और वह लगातार अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। लॉकडाउन के कारण महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए सोनू सूद ने बसों की व्यवस्था की है और इन बसों के जरिए हर रोज सैकड़ों मजदूर अपने परिवार के बीच पहुंच रहे हैं। सोनू सूद के इस काम की हर तरफ तारीफ हो रही है वहीं प्रवासी अपने घर पहुंचकर सोनू सूद को मैसेज भेज कर दुआएं दे रहे हैं। ऐसी ही एक मां जिसका बेटा मुंबई में फंसा था जिसे सोनू सूद ने बस से बिहार उसके घर भिजवाया उस मां ने भावुक होकर एक वीडियो संदेश भेजा जिस पर कलाकार ने दिल जीतने वाला जवाब दिया।

प्रवासी की मां ने भेजा एक भावुक वीडियो

प्रवासी की मां ने भेजा एक भावुक वीडियो

जिस प्रवासी बेटे की मां ने ये वीडियो भेजा उसका नाम मनीष है वो बिहार का रहने वाला हैं। वो कुछ महीने पहले ही मुंबई में एक्‍टर बनने के लिए आया था लेकिन लॉकडाउन के कारण कोई काम नहीं मिला और तंगहाली में मुंबई में फंस गया। जिसे सोनू सूद ने प्रवासी लोगों के साथ बस में उसके घर भिजवाया था। ये वो ही मनीष हैं जिसका जिक्र कलाकार सोनू सूद ने अपने मीडिया इंटरव्‍यू में पूछे गए एक सवाल के जवाब में किया था। सोनू सूद की बदौलत बिहार का ये नवजवान युवक अपनी मां और परिवार से मिल सका। मनीष ने ट्वीटर पर सोनू सूद को टैक करते हुए अपनी मां का एक भावुक वीडियो पोस्‍ट किया और लिखा सर मेरी मां आपसे कुछ कहना चाहती हैं सुन लीजिए, आपको बहुत शुक्रिया, ये मेरी मां के खुशी के आसूं हैं। इस वीडियो में मनीष की मां ने कहा कि मेरे लाल को आपने घर पहुंचवाया इसके लिए आपको मैं दिल से शुक्रिया अदा करती हूं। आपने एक भाई बन कर इस मां की मदद की..... ये कहते हुए इस मां की आंखें भर आई।

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    जानिए सोनू सूद ने क्या जवाब दिया

    जानिए सोनू सूद ने क्या जवाब दिया

    सोनू सूद ने मनीष के इस संदेश का जवाब देते हुए लिखा - बहुत सही मेरे भाई। माता जी को प्रणाम। बहुत खुश हूँ कि मैं तुम को तुम्हारी माँ से मिलवा पाया। शब्द नहीं हैं मेरे पास। बस अभी और बहुत सारे मनीष अपनी माओं से जल्द से जल्द मिल पायें। इसी की कोशिश रहेगी।

    मुश्किल हालात में मसीहा बने सोनू सूद

    बता दें कि कोरोन वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन लगाया गया था, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया। इसके बाद प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने-अपने घरों के लिए निकल पड़े थे। ऐसे मुश्किल हालात में सोनू सूद ने प्रवासी मजदूरों के लिए बसों की व्यवस्था की और उन्हें उनके घर भेजना शुरू किया। बसों की व्यवस्था करते हुए सोनू सूद ने कहा कि मेरा मानना है कि वर्तमान समय में जब हम सभी इस वैश्विक स्वास्थ्य आपदा का सामना कर रहे हैं तो प्रत्येक भारतीय को अपने परिवार और प्रियजनों के साथ रहना चाहिए और वह इसका हकदार भी है।

    18 घंटे कर रहे काम

    18 घंटे कर रहे काम

    सोनू सूद अब तक हजारों प्रवासी मजदूरों को घर भिजवा चुके हैं। उनका कहना है कि वह जब तक हर एक प्रवासी मजदूर उसके घर नहीं पहुंच देते, अपनी मुहिम को जारी रखेंगे। प्रवासियों को घर पहुंचाने के लिए वह 18-18 घंटे मेहनत कर रहे हैं। सोनू सूद के इस काम में उनकी दोस्त नीति गोयल पूरा साथ दे रही हैं।

    सोशल मीडिया पर दिया हेल्पलाइन नंबर

    सोशल मीडिया पर दिया हेल्पलाइन नंबर

    सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर हेल्प लाइन नंबर बांटा है ताकि बाहर जाने वाले लोग उनसे सम्पर्क कर सकें। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है, 'मेरे प्यारे श्रमिक भाइयों और बहनों। अगर आप मुंबई में है और अपने घर जाना चाहते हैं तो कृपया इस नंबर पर कॉल करें 18001213711 और बताएं कि आप कितने लोग हैं, अभी कहां पर हैं और कहां जाना चाहते हैं। मैं और मेरी टीम जो भी मदद कर पाएंगे हम जरूर करेंगे।'

    'जब तक अंतिम प्रवासी अपने घर नहीं पहुंच जाता, तब तक...'

    'जब तक अंतिम प्रवासी अपने घर नहीं पहुंच जाता, तब तक...'

    सोनू सूद ने एक बयान में कहा था, 'यह मेरे लिए एक बेहद भावनात्मक समय है। घरों से दूर सड़कों पर चलते इन प्रवासियों को देखकर मुझे दुख होता है। जब तक अंतिम प्रवासी अपने परिवार और प्रियजनों से नहीं मिल जाता, तब तक मैं प्रवासियों को घर भेजना जारी रखूंगा। ये लोग मेरे दिल के बहुत करीब हैं।' सोनू सूद की मदद से अब तक वडाला से लखनऊ, हरदोई, प्रतापगढ़ और सिद्धार्थनगर समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए बसें रवाना हुई हैं। इसके अलावा कर्नाटक, झारखंड और बिहार के कई जिलों के प्रवासी मजदूरों को भी सोनू सूद उनके परिवार से मिला चुके हैं।

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