'जिंदा घर पहुंच गए तो ठीक, नहीं तो बात ही खत्म': जानिए, महाराष्ट्र से यूपी पैदल जा रहे मजदूरों की मजबूरी
भोपाल। केंद्र और राज्य सरकारों की लाख कोशिशों को बावजूद प्रवासी मजदूरों का पलायन थम नहीं रहा है। जो लोग रेलवे की मजदूर स्पेशल ट्रेन में सफर नहीं कर पा रहे है वह आज भी अपने घरों की ओर पैदल ही सफर कर रहे हैं। महाराष्ट्र से करीब 100 प्रवासी मजदूरों का एस समूह पैदल ही अपने स्थानीय राज्यों को लौट रहा है। मीडिया से बात करते हुए उनमें से एक ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश जा रहे हैं। देशबंदी की वजह से नौकरी चली गई है जिसके कारण हमारे सामने आजीविका की समस्या खड़ी हो गई है।

भोपाल में एक ट्रक वाले ने की मदद
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक तस्वीरों में दिखाई दे रहे मजदूर महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश की ओर जा रहे हैं। महाराष्ट्र से अपने स्थानीय राज्यों को लौट रहे लगभग सौ से भी ज्यादा की संख्या में प्रवासी मजदूर भोपाल में एक ट्रक की मदद से इलाहाबाद (प्रयागराज) के लिए रवावा हुए। उनमें से एक ने बताया कि महाराष्ट्र में जब तक बचत के पैसे थे गुजारा किया लेकिन अब हमारे पास खाने को कुछ नहीं है।

महाराष्ट्र के भिवंडी से पैदल शुरू किया सफर
हैंडलूम में कामगार बालकृष्ण ने कहा, महाराष्ट्र के भिवंडी से पैदल आ रहा हूं, मुझे जौनपुर जाना है। हम लोगों को यात्रा करते हुए आज 8-9 दिन हो गए हैं। जब तक पैसा था तब तक खाना खाया, जब मरने वाली स्थिति हुई तो पैदल चल दिए। रास्ते में बच्चे को देखकर लोग थोड़ा बहुत कुछ खाने को देते थे। उन्होंने बताया कि जब खर्चे के लिए मालिक से बात की तो उन्होंने कहा, जाओ घर अब, जैसे पहचानते ही नहीं हैं, कोई एक दूसरे की मदद करने को राजी नहीं है।
#WATCH महाराष्ट्र, भिवंडी से पैदल आ रहा हूं,मुझे जौनपुर जाना है।हम लोगों को यात्रा करते हुए आज 8-9 दिन हो गए हैं। जब तक पैसा था तब तक खाना खाया जब मरने वाली स्थिति हुई तो पैदल चल दिए।रास्ते में बच्चे को देखकर लोग थोड़ा बहुत कुछ खाने को देते थे: बालकृष्ण, हैंडलूम में कामगार #भोपाल https://t.co/OKQW61QZHO pic.twitter.com/vFgPeb536a
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 12, 2020
ऐसे भूखे मरने से अच्छा है कि...
उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिला के निवासी बालकृष्ण ने बताया कि कुछ दिनों तक रामदेव बाबा के ट्रस्ट की ओर से जो खाना मिला खाते थे लेकिन अब वह भी बंद हो गया है, ऐसे भूखे मरने से अच्छा है चलो पैदल ही। बालकृष्ण ने कहा, जिंदा रहे तो घर पहुंच जाएंगे, नहीं तो बात ही खत्म हो जाएगी। गौरतलब है कि मजदूरों के पलायन की समस्या सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।
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